
देहरादून : राजधानी देहरादून में आयोजित ‘अग्निवीर संवाद’ कार्यक्रम में आज युवाओं का एक अभूतपूर्व उत्साह देखने को मिला। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कार्यक्रम में पहुंचे हजारों युवाओं से सीधे दिल की बात की। इस दौरान अग्निवीरों के उज्ज्वल भविष्य, देश सेवा के जज्बे और सेना से लौटने के बाद उनके पुनर्वास (रोजगार) जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर खुलकर चर्चा हुई।
युवाओं की भारी भीड़ और उनकी सक्रिय भागीदारी ने यह साफ कर दिया कि देवभूमि का युवा राष्ट्र निर्माण और देश की सीमाओं की रक्षा के लिए पूरी तरह मुस्तैद और उत्साहित है।
“सैनिकों और उनके परिवारों का सम्मान हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता”
संवाद के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तराखंड के सैन्य इतिहास को याद करते हुए युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए राज्य सरकार के एक बड़े फैसले को दोहराया:
10% क्षैतिज (Horizontal) आरक्षण: मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड वीरभूमि है। यहां के सैनिकों का सम्मान सरकार के लिए सबसे ऊपर है। इसी संकल्प के तहत राज्य सरकार ने अग्निवीरों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए सरकारी सेवाओं में 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण देने का ऐतिहासिक कानून बनाया है।
सम्मानजनक रोजगार: इस फैसले का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि 4 साल की देश सेवा के बाद जब अग्निवीर वापस लौटेंगे, तो उन्हें उत्तराखंड सरकार की नौकरियों में प्राथमिकता के साथ सम्मानजनक रोजगार के बेहतरीन अवसर मिलेंगे।
अनुभव और कौशल का होगा सही इस्तेमाल
अनुशासित कार्यबल: मुख्यमंत्री ने रेखांकित किया कि सेना में रहकर जो अनुशासन, शारीरिक दक्षता और तकनीकी कौशल (Skills) ये युवा सीखेंगे, उसका उपयोग उत्तराखंड के विकास में किया जाएगा। सरकार का लक्ष्य अग्निवीरों के इस बेहतरीन अनुभव का प्रभावी इस्तेमाल कर उन्हें पुलिस, आपदा प्रबंधन और अन्य तकनीकी विभागों में बेहतर अवसर उपलब्ध कराना है।
सैन्य गौरव की परंपरा होगी और मजबूत
इस संवाद कार्यक्रम ने एक बार फिर साबित किया है कि धामी सरकार सैनिकों, पूर्व सैनिकों, अग्निवीरों और उनके आश्रितों के कल्याण के लिए पूरी संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है। उत्तराखंड में सैन्य गौरव की जो महान परंपरा रही है, उसे और सशक्त बनाने तथा युवाओं के भविष्य को संवारने के लिए सरकार लगातार धरातल पर ठोस कदम उठा रही है।



