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भारत को प्रॉफिट पाकिस्तान को लॉस..UAE के OPEC छोड़ने से किसको कितना नफा-नुकसान…

संयुक्त अरब अमीरात ने OPEC से बाहर निकलने का फैसला किया है, जो सऊदी अरब और पाकिस्तान के गठजोड़ के खिलाफ उसकी नाराजगी को दर्शाता है, ईरान के साथ टकराव अमेरिका की नीति बदलाव और खाड़ी सहयोग परिषद के समर्थन की कमी ने यूएई को यह कदम उठाने पर मजबूर किया।

संयुक्त अरब अमीरात नेअपने हालिया कदमों से साफ संकेत दिया है कि पाकिस्तान सऊदी अब के खिलाफ रणनीति बना रहा है, तेल उत्पादक देशों के संगठन OPEC से बाहर निकालने का उसका फैसला सऊदी अरब को बड़ा झटका देने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है, वहीं यह फैसला पाकिस्तान के लिए भी या बड़ा मैसेज बनकर सामने आया है जिसने पड़ोसी मूल की परेशानी पर निशाना लाद दिए हैं।

पाकिस्तान को झटका तो क्या भारत को लाभ
इस पूरे मामले को भारत के लिहाज से देखें तो सवाल उठता है कि क्या यह फैसला भारत के पक्ष में जा सकता है, असल में यूएई के फैसले से ग्लोबल मार्केट की तेल की सप्लाई बढ़ सकती है, कीमतों में कमी आ सकती है, इसका सीधा फायदा भारत जैसे आयात करने वाले देशों को मिल सकता है, क्योंकि उनका तेल खर्च कम होगा और महंगाई पर भी असर पड़ेगा।

ऐसे में जहां भारत को सस्ते तेल और ऊर्जा साझेदारी का फायदा मिल सकता है, वहीं पाकिस्तान के लिए यह स्थिति आर्थिक दबाव और रणनीतिक असहजता बढ़ाने वाली बन सकती है।

यूएई ने क्यों लिया ऐसा फैसला
अब इस पूरे फैसले को कैनवस पर और बड़ा करके देखें तो नजर आता है कि, इससे पहले कहीं घटनाक्रम तेजी से सामने आए ईरान के साथ टकराव के दौरान सीधे हमले का सामना करना पड़ा जबकि खाड़ी सहयोग परिषद के देशों से उसे वह समर्थन नहीं मिला जिसकी उसे उम्मीद थी, वहीं अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक तरफ युद्ध विराम की घोषणा कर खुद को पीछे खींच लिया है, खुद को सैन्य रूप से असुरक्षित महसूस करने लगा।

पाकिस्तान को लेकर क्या है, यूएई की राय
यूएई कामना है कि पाकिस्तान ने मध्यस्थ की भूमिका निभाकर ईरान का शब्द रुख नही अपनाया जिसे अबू धाबी में नाराजगी बढ़ी, इस संघर्ष को ब्लैक एंड वाइट की तरह देख रहा।

इसी नाराजगी के चलते यूं ही ने पाकिस्तान से 3.5 अरब डॉलर का कर्ज समय से पहले लौटने की मांग कर दी जो पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार का बड़ा हिस्सा था।
हालांकि बाद में सऊदी अरब में पाकिस्तान को 3 अरब डॉलर का कर्ज देकर राहत दे और 5 अरब डॉलर की क्रेडिट लाइन देने का वादा किया।

पाकिस्तान और सऊदी के बीच रक्षा समझौता
सितंबर 2025 में पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच एक रक्षा समझौता भी हुआ जिसके तहत पाकिस्तान जरूरत पड़ने पर सुरक्षा के लिए अपने परमाणु और मिसाइल संसाधन दे सकता है, ईरान के हमले के बाद पाकिस्तान में सऊदी अरब को ही समझौते के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

यूएई और भारत के मजबूत संबंध
इन घटनाओं के बीच खाड़ी देशों के भीतर दरार साफ नजर आने लगी है जहां यूएई भारत के साथ मजबूत संबंध बनाए हुए हैं वही सऊदी अरब पाकिस्तान और तुर्की के बीच एक नया रणनीतिक गठजोड़ की चर्चा हो रही है यमन और सूजन जैसे क्षेत्रों में भी सऊदी अरब और यूएई के बीच मतभेद बड़े हैं।

तेल उत्पादन को लेकर भी दोनों देशों के बीच मतभेद सामने आए हैं दर्शकों से सऊदी अरब ओपी का नेतृत्व करता रहा लेकिन यूएई अब अपने उत्पादन पर किसी तरह की पाबंदी नहीं जाता ओपी से बाहर निकालने के बाद हुई अब अपनी पूरी क्षमता से तेल उत्पादन कर सके का जो वैश्विक बाजार में उसके लिए आर्थिक रूप से फायदेमंद हो सकता है।

सऊदी के साए में नहीं रहना चाहता UAE
यह की ऊर्जा मंत्री सुनील मोहम्मद अल माजूरी ने कहा कि यह फैसला देश के दीर्घकालिक ऊर्जा रणनीति और बाजार की जरूरत के अनुरूप लिया गया है, वही उद्योग मंत्री सुल्तान अल जावर ने इसे राष्ट्रीय हित और वैश्विक ऊर्जा स्थिरता के लिहाज से जरूरी कदम बताया।

करीब 59 साल बाद ओपी से अलग होने का यूएई का यह फैसला वैश्विक राजनीति और ऊर्जा बाजार में बड़े बदलाव का संकेत माना जा रहा है हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि सऊदी अरब के साथ उसके संबंध पूरी तरह से खत्म हो गए हैं दोनों देश अभी बड़े व्यापारिक साझेदार हैं। लेकिन इतना तय है कि अबू धाबी नहीं यह साफ कर दिया है कि वह आप सऊदी नेतृत्व के साइन में रहने को तैयार नहीं है मौजूदा युद्ध नाकेबंदी और बदलते गठखोज के बीच हुई का योग कदम खाड़ी राजनीति में अपने समीकरणों को शुरुआत कर सकते हैं।

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