Uttarakhand

चारधाम यात्रा में टूटा रिकॉर्ड, CM धामी बोले- “यात्रियों की सुरक्षा सर्वोपरि…

उत्तराखंड में विश्व प्रसिद्ध चारधाम यात्रा इस बार अपने चरम पर है और हर दिन आस्था का एक नया इतिहास रचा जा रहा है। देश-विदेश से आ रहे लाखों श्रद्धालुओं की बदौलत इस वर्ष यात्रा ने पिछले सभी रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं। चारधाम यात्रा की इसी अभूतपूर्व सफलता और व्यवस्थाओं को लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बड़ा बयान दिया है। मुख्यमंत्री ने बताया कि इस सीजन में अब तक रिकॉर्ड 30 लाख से अधिक तीर्थयात्री चारों धामों के दर्शन कर चुके हैं।

स्थानीय कारोबारियों में भारी उत्साह
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आने से उत्तराखंड के स्थानीय पर्यटन व्यवसाय को नई ताकत मिली है। राज्य के होटल संचालक, टैक्सी ड्राइवर, ढाबा मालिक और टूर गाइड सभी में इस सफल सीजन को लेकर भारी उत्साह और खुशी का माहौल है। सीएम ने साफ किया कि इस यात्रा को पूरी तरह सुरक्षित और व्यवस्थित रखना राज्य सरकार की सबसे बड़ी जिम्मेदारी और सर्वोच्च प्राथमिकता है, ताकि देवभूमि आने वाले किसी भी श्रद्धालु को असुविधा न हो।

रात 10 बजे के बाद यात्रा पर ब्रेक: सुरक्षा के लिए बड़ा फैसला
पहाड़ी इलाकों में अचानक बदलते मौसम और मानसून की आहट के बीच मुख्यमंत्री ने यात्रियों की सुरक्षा के मद्देनजर एक बेहद महत्वपूर्ण फैसले की जानकारी दी। सीएम धामी ने कहा:

“उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में हमने तय किया है कि रात्रि 10 बजे के बाद यात्रा को पूरी तरह रोक दिया जाएगा। रात 10 बजे तक यात्री जिस भी पड़ाव या स्थान पर पहुंचे हैं, उन्हें वहीं रोक कर आराम करवाया जाए और उनके सुरक्षित रुकने की व्यवस्था की जाए। चूंकि इन दिनों पहाड़ों में कई जगह भूस्खलन (Landslide) की घटनाएं हो रही हैं और मौसम भी अचानक खराब हो जा रहा है, इसलिए रात के समय यात्रा जोखिम भरी हो सकती है।”

मंदिर समितियों से बातचीत कर की गई मुकम्मल व्यवस्था
मुख्यमंत्री ने आगे बताया कि यात्रा को निर्बाध (बिना किसी बाधा के) चलाने और दर्शन व्यवस्था को सुगम बनाने के लिए मंदिर समितियों, स्थानीय प्रशासन और सभी हितधारकों (Stakeholders) से गहन बातचीत की गई है। यात्रियों को लंबी लाइनों या मौसम के कारण ज्यादा परेशानी का सामना न करना पड़े, इसके लिए विशेष प्रावधान लागू किए गए हैं। सरकार का पूरा ध्यान इस बात पर है कि हर श्रद्धालु देवभूमि से एक सुखद और सुरक्षित याद लेकर अपने घर लौटे।

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