
नई दिल्ली: दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक और सुरक्षाकर्मियों के बीच हुई तीखी बहस का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में वांगचुक अस्पताल के फर्श पर लेटे हुए सुरक्षाकर्मियों पर मानसिक प्रताड़ना का आरोप लगाते और खुद को गिरफ्तार करने की बात कहते नजर आ रहे हैं।
वीडियो के सामने आने के बाद दिल्ली पुलिस के अधिकारियों और सफदरजंग अस्पताल प्रशासन ने पूरे घटनाक्रम पर अपनी स्थिति स्पष्ट की है।
क्या है वायरल वीडियो में? (वांगचुक का आरोप)
वांगचुक द्वारा अपने आधिकारिक सोशल मीडिया और यूट्यूब पर साझा किए गए इस वीडियो में वे सुरक्षाकर्मियों और पुलिस अधिकारियों से बहस करते दिख रहे हैं:
‘यह मानसिक यातना है’: वीडियो में वांगचुक कहते हैं— “अनशन के 20वें दिन मुझे तीन घंटे तक परेशान क्यों किया जा रहा है? आप लोग मुझे जबरदस्ती रोक रहे हैं, यह यातना है। अगर तनाव के कारण मेरी मौत हो जाती है, तो इसकी जिम्मेदारी आप सभी की होगी।”
अस्पताल के फर्श पर लेटे: बहस बढ़ने पर वांगचुक विरोधस्वरूप सफदरजंग अस्पताल के फर्श पर ही लेट गए। इस दौरान उनकी पत्नी गीतांजलि अंगमो भी वहां मौजूद थीं।
उत्तर कोरिया जैसा व्यवहार: वांगचुक ने आरोप लगाया कि अस्पताल में उनके साथ ‘कैदी’ जैसा व्यवहार किया गया। उन्हें किसी से मिलने नहीं दिया गया और फोन/लैपटॉप रखने की भी अनुमति नहीं थी।
अधिकारियों और अस्पताल प्रशासन का स्पष्टीकरण
मामला तूल पकड़ने के बाद अधिकारियों और सफदरजंग अस्पताल ने बयान जारी कर स्पष्ट किया कि यह घटना 21 जुलाई की है:
लिखित आदेश का इंतजार: अधिकारियों ने बताया कि 21 जुलाई को दिल्ली हाईकोर्ट ने वांगचुक को मेदांता अस्पताल (गुरुग्राम) शिफ्ट करने की मौखिक अनुमति दी थी। वांगचुक मीडिया की खबरों के आधार पर तुरंत जाना चाहते थे, लेकिन सुरक्षा कारणों से पुलिस और अस्पताल प्रशासन लिखित आदेश का इंतजार कर रहा था।
आदेश मिलते ही किया गया शिफ्ट: सफदरजंग अस्पताल के अनुसार, “शाम 6:40 बजे जैसे ही दिल्ली हाईकोर्ट का औपचारिक लिखित आदेश प्राप्त हुआ, बिना किसी विलंब के सोनम वांगचुक को मेदांता अस्पताल के डॉक्टरों की टीम को सौंप दिया गया।”
वांगचुक ने क्यों तोड़ा अनशन?
26 दिनों तक चली भूख हड़ताल (जिसमें उनका 11 किलो वजन कम हुआ) को समाप्त करने के फैसले पर वांगचुक ने बताया कि उन्होंने केंद्र सरकार से लिखित आश्वासन मिलने के बाद ही अनशन तोड़ा है। केंद्र ने भरोसा दिया है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल किसी भी छात्र या नागरिक के खिलाफ कोई दंडात्मक/कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी।



