
गुवाहाटी: नीट (NEET) परीक्षा में कथित धांधली और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर असम के गुवाहाटी में हुए छात्र प्रदर्शन ने एक नया राजनीतिक मोड़ ले लिया है। इस विरोध प्रदर्शन में असम सरकार के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री व एजीपी (AGP) नेता केशब महंता की बेटी दिबिसा भी शामिल हुईं।
दिबिसा के प्रदर्शन में शामिल होने और सरकार विरोधी नारे लगाने का वीडियो सामने आने के बाद राज्य में राजनीतिक बहस छिड़ गई है। इस पूरे विवाद पर असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने अपने मंत्री का बचाव करते हुए एक बड़ा बयान दिया है।
CM हिमंत सरमा ने मंत्री का किया बचाव
सोमवार को इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने स्पष्ट कहा कि किसी भी पिता को उनकी वयस्क (Adult) बेटी के राजनीतिक विचारों या फैसलों के लिए ट्रोल या जिम्मेदार नहीं ठहराया जाना चाहिए:
“हर बेटे या बेटी का अपने माता-पिता की राजनीतिक विचारधारा का पालन करना जरूरी नहीं है। अगर कल मेरा बेटा वकालत करते हुए ऐसे व्यक्ति का पक्ष ले जिसे मैं पसंद न करता हूँ, तो उसकी जिम्मेदारी मुझ पर नहीं डाली जा सकती। केशब महंता जी को इस मामले में निशाना बनाना पूरी तरह गलत है।”
— हिमंत बिस्वा सरमा (मुख्यमंत्री, असम)
‘नारों से सहमत नहीं, खुद दिबिसा से बात करूंगा’
मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि वे प्रदर्शन के दौरान दिबिसा द्वारा लगाए गए नारों और रुख से पूरी तरह असहमत हैं। उन्होंने कहा कि जब भी उनकी मुलाकात दिबिसा से होगी, वे एक अभिभावक के तौर पर उनसे बात करेंगे और उन्हें समझाने का प्रयास करेंगे कि सार्वजनिक रूप से ऐसे नारे लगाना उचित नहीं था।
क्या था पूरा मामला?
गुवाहाटी में विभिन्न छात्र संगठनों द्वारा नीट पेपर लीक मामले को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर एक बड़ी विरोध रैली का आयोजन किया गया था।
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में मंत्री केशब महंता की बेटी दिबिसा प्रदर्शनकारियों के साथ हाथों में बैनर लिए नारेबाजी करती दिखीं। घटना के बाद जब सत्तारूढ़ दल और विपक्ष के बीच जुबानी जंग तेज हुई, तब मुख्यमंत्री का यह बयान आया। हालांकि, इस मामले पर फिलहाल मंत्री केशब महंता की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।



