
वैश्विक मंच पर उत्तराखंड की मजबूत पहचान
प्राकृतिक आपदाओं, भूस्खलन, और अतिवृष्टि की दृष्टि से बेहद संवेदनशील और चुनौतीपूर्ण भौगोलिक परिस्थितियों वाले उत्तराखंड ने आपदा प्रबंधन (Disaster Management) के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर अपनी सफलता का लोहा मनवाया है। ओडिशा के पुरी में संपन्न हुई ब्रिक्स डिजास्टर रिस्क रिडक्शन वर्किंग ग्रुप की द्वितीय तकनीकी बैठक में उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (USDMA) और एसडीआरएफ (SDRF) के मॉडल्स की मुक्त कंठ से सराहना की गई। इस तीन दिवसीय सम्मेलन में दुनिया के 11 प्रमुख देशों के नीति निर्माताओं और तकनीकी विशेषज्ञों के सामने उत्तराखंड की बहु-एजेंसी समन्वय प्रणाली (Multi-Agency Coordination) को एक “आदर्श मॉडल” के रूप में प्रस्तुत किया गया।
सिल्क्यारा टनल रेस्क्यू’ और ‘धराली’ केस स्टडी का प्रदर्शन
सम्मेलन में उत्तराखंड की ओर से प्रतिनिधित्व कर रहे सेनानायक एसडीआरएफ अर्पण यदुवंशी (IPS) और यूएलएमएमसी के निदेशक शांतनु सरकार ने राज्य की प्रस्तुति दी। इस दौरान दो प्रमुख घटनाओं को वैश्विक विशेषज्ञों के सामने रखा गया: सिल्क्यारा टनल रेस्क्यू ऑपरेशन: उत्तरकाशी की सिल्कयारा सुरंग में फंसे श्रमिकों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए चलाए गए दुनिया के सबसे जटिल रेस्क्यू ऑपरेशंस में से एक की बारीकियों को साझा किया गया। प्रतिनिधियों ने माना कि अत्यधिक कठिन हिमालयी परिस्थितियों में धैर्य, आधुनिक तकनीक, अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों और स्थानीय प्रशासन का ऐसा अनूठा समन्वय विरला ही देखने को मिलता है।
धराली आपदा प्रबंधन: धराली क्षेत्र में आई आपदा के दौरान त्वरित रिस्पांस, सटीक पूर्वानुमान और कम से कम जनहानि सुनिश्चित करने वाले ‘क्विक एक्शन मॉडल’ को भी सराहा गया। तकनीक और पूर्व चेतावनी तंत्र (Early Warning System) पर फोकस प्रस्तुति के दौरान विशेषज्ञों को बताया गया कि कैसे आपदा प्रबंधन सचिव विनोद कुमार सुमन के निर्देशन में उत्तराखंड अब केवल “राहत और बचाव” (Relief and Rescue) तक सीमित नहीं है, बल्कि “पूर्व तैयारी और जोखिम न्यूनीकरण” (Mitigation & Preparedness) पर काम कर रहा है।
यूएलएमएमसी के निदेशक शांतनु सरकार ने बताया कि राज्य में:
भू-स्थानिक तकनीक (Geospatial Technology)
रिमोट सेंसिंग (Remote Sensing)
डेटा एनालिटिक्स (Data Analytics)
के जरिए ग्लेशियर झीलों, भूस्खलन संभावित क्षेत्रों और चारधाम यात्रा मार्गों की चौबीसों घंटे निगरानी की जा रही है, जिससे भविष्य की आपदाओं का पूर्वानुमान लगाना आसान हुआ है।
मुख्यमंत्री का सक्रिय दृष्टिकोण और स्थानीय समुदायों की भागीदारी
सेनानायक एसडीआरएफ अर्पण यदुवंशी ने सम्मेलन में कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के संवेदनशील और सक्रिय दृष्टिकोण के कारण ही आज सभी सुरक्षा एजेंसियां और नागरिक प्रशासन एक सूत्र में बंधकर काम कर रहे हैं। पर्वतीय क्षेत्रों में आपदा से लड़ने के लिए स्थानीय समुदायों को ‘फर्स्ट रिस्पॉन्डर’ के रूप में प्रशिक्षित किया जा रहा है। यही कारण है कि आज उत्तराखंड एसडीआरएफ की त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता को देश के सर्वश्रेष्ठ आपदा प्रतिक्रिया बलों में गिना जाता ह
वैश्विक आपदा रणनीति को मिलेगी नई दिशा
ब्रिक्स (BRICS) देशों के इस सम्मेलन की सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही कि उत्तराखंड के व्यावहारिक अनुभवों से अब अन्य देश भी अपनी आपदा रणनीतियों में सुधार कर सकेंगे। चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में तकनीक और मानवीय दृष्टिकोण का जो संतुलन उत्तराखंड ने दिखाया है, उसे वैश्विक स्तर पर मान्यता मिलना राज्य के साथ-साथ पूरे भारत के लिए एक बड़ी गौरवपूर्ण उपलब्धि है.



