
केंद्र सरकार ने प्रसिद्ध जलवायु कार्यकर्ता और इंजीनियर Sonam Wangchuk की राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत की गई हिरासत को रद्द कर दिया है। इस फैसले के बाद उन्हें बड़ी राहत मिली है। सरकार के इस निर्णय के बाद पर्यावरण से जुड़े कई संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इसे सकारात्मक कदम बताया है।
क्यों हुई थी हिरासत
सोनम वांगचुक को हाल ही में लद्दाख से जुड़े पर्यावरण और जलवायु मुद्दों पर किए जा रहे उनके आंदोलन के दौरान हिरासत में लिया गया था। प्रशासन का कहना था कि आंदोलन के कारण क्षेत्र में कानून-व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। इसी आधार पर उन्हें National Security Act के तहत हिरासत में रखा गया था।
हालांकि इस कदम की देशभर में आलोचना हुई थी और कई सामाजिक संगठनों, पर्यावरण कार्यकर्ताओं और नागरिक समूहों ने उनकी रिहाई की मांग की थी।
केंद्र ने क्यों लिया फैसला
सरकारी सूत्रों के अनुसार हालात की समीक्षा के बाद केंद्र सरकार ने उनकी हिरासत को समाप्त करने का निर्णय लिया। अधिकारियों का कहना है कि अब स्थिति सामान्य है और कानून-व्यवस्था को लेकर कोई बड़ा खतरा नहीं है।
कौन हैं सोनम वांगचुक
सोनम वांगचुक एक प्रसिद्ध इंजीनियर, शिक्षा सुधारक और जलवायु कार्यकर्ता हैं। वे लद्दाख में पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के मुद्दों पर लंबे समय से काम कर रहे हैं।
उनका नाम खास तौर पर आइस स्तूप (Ice Stupa) तकनीक के कारण दुनिया भर में जाना जाता है, जो पहाड़ी इलाकों में पानी की कमी से निपटने का एक अनोखा समाधान है।
सोनम वांगचुक की पहचान एक ऐसे सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में भी है, जो हिमालयी क्षेत्रों में जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को लेकर लगातार जागरूकता फैलाते रहे हैं।
पर्यावरण कार्यकर्ताओं की प्रतिक्रिया
उनकी हिरासत खत्म होने के फैसले के बाद कई पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने खुशी जताई है। उनका कहना है कि पर्यावरण और जलवायु जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर आवाज उठाने वाले लोगों के साथ संवाद होना चाहिए।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला सरकार और सामाजिक कार्यकर्ताओं के बीच संवाद के नए रास्ते खोल सकता है।



