
देहरादून: मुख्यमंत्री आवास में भारतीय जनता पार्टी प्रदेश महिला मोर्चा के एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से शिष्टाचार भेंट की। इस मुलाकात के दौरान महिला मोर्चा की पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री को उनके 5 वर्ष के सफल, बेदाग और जनसेवा को समर्पित कार्यकाल के लिए बधाई और हार्दिक शुभकामनाएं दीं।
इस दौरान देवभूमि के समग्र विकास, महिला सशक्तिकरण और राजनीति से लेकर अर्थव्यवस्था तक में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने जैसे गंभीर विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई।
“मातृशक्ति की प्रगति के बिना हर विकास अधूरा” : सीएम धामी
प्रतिनिधिमंडल का स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि किसी भी समाज या राज्य की उन्नति तब तक अधूरी है, जब तक वहां की महिलाओं को सुरक्षा, सम्मान और आत्मनिर्भरता का खुला आसमान न मिले। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘महिला नेतृत्व में विकास’ (Women-led Development) के विजन को रेखांकित करते हुए केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं के जमीनी असर को साझा किया।
पर्वतीय महिलाओं के जीवन में आए 3 सबसे बड़े बदलाव:
धुएँ से मुक्ति (उज्ज्वला योजना): पहाड़ों में जो बहनें घंटों जंगलों से लकड़ी चुनकर लाती थीं और चूल्हे के धुएँ से अपनी आँखें व फेफड़े खराब करती थीं, आज गैस सिलेंडर मिलने से उनका स्वास्थ्य सुधरा है और समय भी बच रहा है।
सिर से उतरा पानी का बोझ (जल जीवन मिशन): कई किलोमीटर दूर से सिर पर पानी ढोकर लाने की मजबूरी अब खत्म हो रही है। घर-घर नल से जल पहुंचने से महिलाओं के श्रम में बड़ी कमी आई है।
सुरक्षा और सम्मान (स्वच्छ भारत मिशन): हर घर शौचालय बनने से ग्रामीण और विशेषकर पर्वतीय क्षेत्रों की महिलाओं को खुले में जाने की विवशता और असुरक्षा से मुक्ति मिली है।
मालिकाना हक से बढ़ी ताकत: सीएम ने कहा कि ‘प्रधानमंत्री आवास योजना’ के तहत मिलने वाले घरों का मालिकाना हक महिलाओं के नाम या संयुक्त रूप से दिए जाने से समाज में उनकी आर्थिक और सामाजिक स्थिति बेहद मजबूत हुई है।
उत्तराखंड सरकार का संकल्प: नौकरी मांगने वाली नहीं, रोजगार देने वाली बनें महिलाएं
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड सरकार महिलाओं को केवल ‘लाभार्थी’ नहीं, बल्कि राज्य के विकास में ‘नेतृत्वकर्ता’ बना रही है। इसके लिए धरातल पर कई ऐतिहासिक कदम उठाए गए हैं:
स्थानीय निकायों में सशक्त भूमिका: निकायों और पंचायतों में महिलाओं के प्रभावी आरक्षण के कारण आज भारी संख्या में बहनें जनप्रतिनिधि बनकर विकास कार्यों का नेतृत्व कर रही हैं।
‘लखपति दीदी’ अभियान: स्वयं सहायता समूहों (SHGs) से जुड़ी ग्रामीण महिलाओं को तकनीकी प्रशिक्षण, वित्तीय मदद और बेहतर बाजार देकर सालाना 1 लाख रुपये या उससे अधिक कमाने के योग्य बनाया जा रहा है।
पहाड़ी उत्पादों की ग्लोबल ब्रांडिंग: महिलाओं द्वारा तैयार किए जा रहे स्थानीय उत्पाद जैसे—मंडुवा, झंगोरा (मोटे अनाज), पहाड़ी मसाले, बुरांश का जूस और हस्तशिल्प को ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म और राष्ट्रीय मेलों के जरिए देशभर में नई पहचान मिल रही है।
महिला स्टार्टअप को बढ़ावा: ऑर्गेनिक फूड प्रोसेसिंग, होम-स्टे और टूरिज्म जैसे क्षेत्रों में युवा बेटियां नए उद्यम लगा रही हैं, जिन्हें सरकार हर स्तर पर सपोर्ट कर रही है।
महिला मोर्चा ने सराहा सरकार का विजन
भेंट के दौरान भाजपा प्रदेश महिला मोर्चा की पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री के नेतृत्व और सुशासन की सराहना की। उन्होंने कहा कि जमीनी स्तर पर नीतियों के सही क्रियान्वयन से आज उत्तराखंड की महिलाओं के आत्मविश्वास में एक अभूतपूर्व बदलाव देखने को मिल रहा है। प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री को आगामी समय में भी इसी ऊर्जा के साथ देवभूमि की सेवा करने के लिए शुभकामनाएं दीं।



