
देशभर में पवित्र महीने रमजान के अंतिम दिनों के साथ ही ‘चांद रात’ को लेकर उत्साह चरम पर पहुंच गया है। हर साल की तरह इस बार भी लोग बेसब्री से चांद दिखने का इंतजार कर रहे हैं, क्योंकि इसी के आधार पर ईद-उल-फितर की तारीख तय होती है।
क्या है ‘चांद रात’ का महत्व?
‘चांद रात’ वह खास शाम होती है जब आसमान में नए चांद का दीदार होता है और इसके साथ ही ईद के त्योहार की आधिकारिक शुरुआत मानी जाती है। यह रात खुशियों, इबादत और तैयारियों का प्रतीक होती है।
बाजारों में दिख रही जबरदस्त रौनक
देश के प्रमुख शहरों में बाजार देर रात तक खुले हुए हैं। कपड़ों, जूतों, इत्र और सजावटी सामान की दुकानों पर भीड़ उमड़ रही है। खासकर महिलाओं और युवाओं में खरीदारी को लेकर खास उत्साह देखा जा रहा है।
मेहंदी और सजावट का खास क्रेज
‘चांद रात’ पर मेहंदी लगवाने की परंपरा भी काफी लोकप्रिय है। बाजारों और गलियों में मेहंदी कलाकारों की लंबी कतारें लगी हुई हैं। इसके अलावा घरों को सजाने और मिठाइयों की तैयारी भी जोरों पर है।
धार्मिक और सामाजिक महत्व
यह रात केवल खरीदारी तक सीमित नहीं होती, बल्कि इसका धार्मिक महत्व भी बेहद खास है। लोग इस दिन इबादत करते हैं, दुआ मांगते हैं और अपने परिवार व समाज के साथ खुशियां साझा करते हैं।
कब मनाई जाएगी ईद?
ईद की तारीख पूरी तरह चांद दिखने पर निर्भर करती है। जैसे ही चांद नजर आता है, अगले दिन ईद का त्योहार मनाया जाता है। इसीलिए पूरे देश में ‘चांद रात’ को लेकर उत्सुकता बनी रहती है।


