
देहरादून। उत्तराखंड की राजनीति से जुड़े एक चर्चित मामले में दून पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए ज्वालापुर के पूर्व विधायक सुरेश राठौर को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस का आरोप है कि उन्होंने भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री एवं उत्तराखंड प्रभारी दुष्यंत कुमार गौतम को एक चर्चित हत्याकांड में फंसाने की साजिश रची और इसके लिए कथित तौर पर फर्जी ऑडियो और वीडियो तैयार कराए।
पुलिस के अनुसार, इन सामग्रियों को सोशल मीडिया पर प्रसारित कर भाजपा नेताओं की छवि को नुकसान पहुंचाने और प्रदेश का माहौल बिगाड़ने की कोशिश की गई। मामले में पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए सुरेश राठौर को गिरफ्तार कर लिया। बाद में उन्हें अदालत में पेश किया गया, जहां से 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।
शिकायत के बाद शुरू हुई थी जांच
इस पूरे मामले की शुरुआत 5 जनवरी 2026 को हुई थी, जब भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री दुष्यंत कुमार गौतम ने डालनवाला कोतवाली में शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने आरोप लगाया कि सुरेश राठौर और अभिनेत्री उर्मिला सनावर ने कुछ राजनीतिक तत्वों के साथ मिलकर उनके खिलाफ झूठी और भ्रामक ऑडियो-वीडियो सामग्री तैयार की।
शिकायत में यह भी कहा गया था कि इन सामग्रियों को सोशल मीडिया पर वायरल कर भाजपा और उसके वरिष्ठ नेताओं को बदनाम करने का प्रयास किया गया, जिससे प्रदेश की कानून-व्यवस्था और सामाजिक सौहार्द प्रभावित हो सकता था।
तकनीकी जांच में जुटाए गए कई अहम साक्ष्य
मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक देहरादून ने विस्तृत जांच के निर्देश दिए थे। जांच के दौरान पुलिस ने डिजिटल रिकॉर्ड, तकनीकी साक्ष्य, दस्तावेज और संबंधित लोगों के बयान एकत्र किए।
पुलिस का दावा है कि जांच में सामने आए तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर आरोपी के खिलाफ कुछ अतिरिक्त धाराएं भी जोड़ी गईं। इसके बाद गिरफ्तारी की कार्रवाई को अंजाम दिया गया।
मुखबिर की सूचना पर हुई गिरफ्तारी
दून पुलिस के मुताबिक, 14 जून को मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर सुरेश राठौर को बिहारीगढ़ फ्लाईओवर के पास से हिरासत में लिया गया। पूछताछ और आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद उन्हें न्यायालय में पेश किया गया। अदालत ने उन्हें 14 दिन की न्यायिक अभिरक्षा में जिला कारागार सुद्धोवाला भेजने के आदेश दिए।
सोशल मीडिया के दुरुपयोग पर पुलिस का सख्त संदेश
इस कार्रवाई के साथ पुलिस ने साफ संकेत दिया है कि सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर किसी व्यक्ति, संस्था या संगठन की छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करने वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे।
फिलहाल मामले की जांच जारी है और पुलिस इससे जुड़े अन्य पहलुओं की भी पड़ताल कर रही है। राजनीतिक रूप से संवेदनशील माने जा रहे इस प्रकरण पर प्रदेश की नजरें बनी हुई हैं।



