
27 साल पहले देश को झकझोर देने वाले ऑस्ट्रेलियाई मिशनरी ग्राहम स्टेन्स और उनके दो मासूम बेटों की हत्या के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम निर्देश दिया है। शीर्ष अदालत ने ओडिशा सरकार को आदेश दिया है कि वह इस मामले के मुख्य दोषी रवींद्र पाल उर्फ दारा सिंह की समय से पहले रिहाई (Remission) की याचिका पर 15 अगस्त तक हर हाल में फैसला ले।
न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा और न्यायमूर्ति विजय बिश्नोई की पीठ ने कहा कि राज्य सरकार की ‘सजा समीक्षा समिति’ एक महीने के भीतर सभी जरूरी रिकॉर्ड खंगालकर अपना निर्णय तय करे। इस मामले की अगली सुनवाई अब 19 अगस्त को होगी।
क्या है दारा सिंह की दलील?
दारा सिंह ने साल 2024 में सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उसकी दलील है कि:
वह पिछले 24 साल से अधिक समय जेल की सलाखों के पीछे बिता चुका है।
उसे अपने किए पर गहरा पछतावा है और यदि उसे रिहा किया जाता है, तो वह समाज सेवा में अपना जीवन लगाएगा।
उसने ओडिशा सरकार की साल 2022 की समयपूर्व रिहाई नीति के तहत राहत देने की गुहार लगाई है।
इतिहास का वो काला पन्ना: 23 जनवरी 1999 की रात ओडिशा के क्योंझर जिले के मनोहरपुर गांव में एक खौफनाक वारदात हुई थी। दारा सिंह के नेतृत्व में एक उग्र भीड़ ने ग्राहम स्टेन्स और उनके दो बेटों (उम्र 8 और 11 वर्ष) को उनकी गाड़ी समेत जिंदा जला दिया था। इस जघन्य अपराध के लिए दारा सिंह को पहले फांसी की सजा सुनाई गई थी, जिसे बाद में कोर्ट ने उम्रकैद में तब्दील कर दिया था।
- छत्तीसगढ़ DMF घोटाला: कथित मास्टरमाइंड सतपाल सिंह छाबड़ा को सुप्रीम कोर्ट से मिली जमानत
छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित जिला खनिज न्यास (DMF) घोटाले में ईडी (ED) की कार्रवाई का सामना कर रहे कथित सरगना सतपाल सिंह छाबड़ा को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिल गई है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने छाबड़ा की जमानत याचिका को मंजूर कर लिया है।
कोर्ट में क्या दलीलें दी गईं?
सुनवाई के दौरान सतपाल सिंह छाबड़ा के वकील वरिष्ठ अधिवक्ता शोएब आलम ने अदालत के सामने ‘समानता का सिद्धांत’ रखा। उन्होंने दलील दी कि इस पूरे मामले में मुख्य आरोपियों सहित कई सह-आरोपियों को पहले ही जमानत मिल चुकी है।
अनिल टूटेजा का हवाला: कोर्ट को बताया गया कि इसी मामले में छत्तीसगढ़ कैडर के सेवानिवृत्त आईएएस (IAS) अधिकारी अनिल टूटेजा को भी मई 2026 में सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल चुकी है।
अदालत का फैसला: इस तथ्य को संज्ञान में लेते हुए पीठ ने छाबड़ा को जमानत बांड भरने की शर्त पर रिहा करने का आदेश दिया।
क्या है करोड़ों का यह घोटाला?
जांच एजेंसियों के अनुसार, सतपाल सिंह छाबड़ा पर डीएमएफ (DMF) के तहत सरकारी ठेके दिलाने के एवज में करीब 5 करोड़ रुपये की अवैध रिश्वत लेने का आरोप है। गौरतलब है कि डीएमएफ का पैसा खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास और वहां के गरीब आदिवासियों व नागरिकों के कल्याण के लिए आवंटित होता है, जिसमें अफसरों और बिचौलियों की मिलीभगत से बड़े पैमाने पर सेंध लगाई गई।



