
हालिया चुनावी झटकों और देश की बदलती राजनीतिक परिस्थितियों के बीच विपक्षी ‘इंडी (INDIA) गठबंधन’ एक बार फिर एकजुट होने जा रहा है। देश की मौजूदा राजनीतिक स्थिति का जायजा लेने और भविष्य की साझा रणनीति तैयार करने के लिए गठबंधन ने आगामी 6 जून को एक बेहद महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है। इस बैठक में क्षेत्रीय दलों की कमजोर होती स्थिति और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े गंभीर मुद्दों पर मंथन होने की उम्मीद है।
आपसी मतभेद भुलाकर एकजुट होने की कवायद
सूत्रों के मुताबिक, हाल के विधानसभा चुनावों में मिली हार और भारतीय जनता पार्टी (BJP) की लगातार बढ़ती सियासी मजबूती ने विपक्ष को नए सिरे से सोचने पर मजबूर कर दिया है। विपक्ष का मानना है कि ‘लोकतंत्र को बचाने’ के लिए इस समय एकजुटता दिखाना बेहद जरूरी है।
विपक्ष की चिंता की बड़ी वजह: आपसी तालमेल की कमी
विपक्षी खेमे में यह चिंता लगातार गहरी होती जा रही है कि उनके बीच आपसी तालमेल, सीटों के बंटवारे और ठोस रणनीति की कमी का सीधा फायदा सत्ताधारी भाजपा को मिल रहा है। विपक्ष का मानना है कि उनकी बंटी हुई ताकत ही भाजपा की राजनीतिक पकड़ को और मजबूत कर रही है। ऐसे में 6 जून को होने वाली इस बैठक का मुख्य उद्देश्य एक मजबूत और एकजुट विकल्प पेश करना होगा।
चुनावी सूचियों और ईवीएम पर उठेंगे सवाल
हालिया चुनावी नतीजों के बाद विपक्षी नेताओं के तेवर काफी कड़े नजर आ रहे हैं। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने देश की मौजूदा चुनावी प्रक्रिया और वोटर लिस्ट (चुनावी सूचियों) की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
राहुल गांधी का कहना है कि अब चुनाव कराने के तौर-तरीकों को लेकर विपक्ष को बेहद सतर्क और आक्रामक रहने की जरूरत है। उन्होंने विशेष रूप से पश्चिम बंगाल के चुनावी नतीजों का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि वहां भाजपा ने कथित रूप से जनादेश को “चुरा” लिया था। माना जा रहा है कि 6 जून की बैठक में देश की वोटर लिस्ट में कथित गड़बड़ियों और चुनावी पारदर्शिता के मुद्दे पर विपक्ष एक साझा और बड़ा आंदोलन खड़ा करने की रणनीति बना सकता है।
ममता बनर्जी की पहल पर बुलाई गई बैठक
गौरतलब है कि बंगाल चुनाव में सत्ता गंवाने के बाद से ही मुख्यमंत्री ममता बनर्जी लगातार विपक्षी दलों को एक मंच पर लाने की कोशिशों में जुटी हुई थीं। उन्होंने खुद इस बात पर जोर दिया था कि जून के पहले हफ्ते में ‘इंडिया गठबंधन’ की एक बड़ी बैठक बुलाई जानी चाहिए। ममता बनर्जी की इस मांग का मकसद न सिर्फ गठबंधन के मौजूदा साथियों को साथ रखना है, बल्कि कुछ और समान विचारधारा वाले दलों को भी इस मोर्चे में शामिल करना है।



