Uttarakhand

गोपेश्वर से धामी का शक्ति प्रदर्शन: राहुल गांधी की एंट्री से पहले बीजेपी ने खींची बड़ी सियासी लकीर

उत्तराखंड में चुनावी रण भले ही अभी दूर हो, लेकिन सियासी तपिश चरम पर पहुंच चुकी है। चमोली के सीमांत जिला मुख्यालय गोपेश्वर की सड़कों पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का विशाल रोड शो केवल एक सरकारी या संगठनात्मक दौरा नहीं था, बल्कि यह सीधे तौर पर विपक्ष को दिया गया एक बड़ा राजनीतिक संदेश है।

देहरादून में कांग्रेस नेता राहुल गांधी के प्रस्तावित कार्यक्रम से ठीक पहले धामी ने पहाड़ के इस दूरस्थ इलाके में जो जनसैलाब जुटाया, उसने राज्य के राजनीतिक गलियारों में एक नई बहस छेड़ दी है।

मनोवैज्ञानिक बढ़त: भीड़ सिर्फ संख्या नहीं, एक संदेश है
राजनीति का यह पुराना नियम है कि सड़कों पर उमड़ी भीड़ सिर्फ गिनती नहीं होती, बल्कि यह विरोधी खेमे पर मनोवैज्ञानिक बढ़त बनाने का सबसे अचूक हथियार होती है।

बीजेपी का बढ़ता उत्साह: गोपेश्वर की संकरी पहाड़ी सड़कों पर उमड़े जनसैलाब ने बीजेपी कार्यकर्ताओं में नया जोश भर दिया है। पार्टी इसे धामी सरकार की नीतियों पर जनता की पक्की मुहर बता रही है।

कांग्रेस खेमे में हलचल: इस रोड शो की गूंज सिर्फ बीजेपी तक सीमित नहीं रही। अंदरखाने कांग्रेस के रणनीतिकारों और कार्यकर्ताओं के बीच भी इस भारी भीड़ को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।

रणनीतिक टाइमिंग और विपक्ष से मिली ‘तारीफ’
सियासी पंडितों का मानना है कि इस रोड शो की टाइमिंग बेहद सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। राहुल गांधी के उत्तराखंड दौरे से ठीक पहले यह संदेश देने की कोशिश की गई है कि पहाड़ के दुर्गम इलाकों में आज भी बीजेपी की पकड़ कितनी मजबूत है।

विपक्षी विधायक की तारीफ ने बढ़ाई हलचल:
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे दिलचस्प मोड़ तब आया, जब विपक्ष के ही एक कद्दावर कांग्रेस विधायक ने सार्वजनिक मंच से मुख्यमंत्री धामी की लोकप्रियता की खुलकर तारीफ कर दी। उत्तराखंड की तीखी राजनीति में ऐसे दुर्लभ पल कम ही देखने को मिलते हैं, जब विपक्ष का कोई नेता सत्तापक्ष के मुखिया का लोहा इस तरह स्वीकार करे।

अब सबकी नजरें देहरादून पर
गोपेश्वर में बड़ी लकीर खींचकर मुख्यमंत्री धामी ने यह साफ कर दिया है कि उत्तराखंड की सियासत में मुकाबला सिर्फ बंद कमरों के भाषणों का नहीं, बल्कि जमीन पर जनसमर्थन दिखाने का है। अब गेंद कांग्रेस के पाले में है। सबकी निगाहें अब देहरादून में होने वाले राहुल गांधी के कार्यक्रम पर टिकी हैं, जहां कांग्रेस को यह साबित करना होगा कि वह पहाड़ की इस मजबूत चुनौती का जवाब देने के लिए कितनी तैयार है।

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