
नई दिल्ली: नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे स्वयंभू धर्मगुरु आसाराम की अंतरिम जमानत याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। खराब स्वास्थ्य के आधार पर मांगी गई जमानत पर फैसला सुरक्षित रखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने एम्स (AIIMS) के निदेशक को एक विशेष मेडिकल बोर्ड का गठन करने का कड़ा निर्देश दिया है।
जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस पीबी वराले की पीठ ने एम्स के डॉक्टरों की टीम को आसाराम की सेहत का बारीकी से आकलन कर एक हफ्ते के भीतर अपनी सीलबंद रिपोर्ट अदालत में सौंपने का आदेश दिया है।
सुनवाई के दौरान तीखी बहस: SG बोले- ‘तीन महीने पहले तो अयोध्या-काशी घूम रहे थे’
सुनवाई के दौरान राजस्थान सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता ने जमानत का कड़ा विरोध किया:
सॉलिसिटर जनरल की दलील: तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि “आसाराम को पहले इस आधार पर राहत मिली थी कि वह लगभग निष्क्रिय (Bedridden) अवस्था में हैं, लेकिन सिर्फ तीन महीने पहले ही उन्होंने काशी विश्वनाथ और अयोध्या की यात्राएं की थीं और वहां घूम रहे थे।”
सुप्रीम कोर्ट का रुख: इस पर पीठ ने स्पष्ट किया, “हम उन्हें कोई नियमित जमानत नहीं दे रहे हैं। अगर मेडिकल रिपोर्ट देखने के बाद हमें यह संतोष होता है कि वास्तव में उन्हें इलाज की जरूरत है, तभी हम विचार करेंगे। पहले मेडिकल रिपोर्ट आने दीजिए।”
आसाराम के वकील की मांग: आसाराम की ओर से पेश वकील ने कोर्ट से अपील की कि एम्स के डॉक्टरों की टीम यह जांच करे कि क्या आसाराम की हालत ऐसी है कि उन्हें अस्पताल में भर्ती (Hospitalize) कराने की जरूरत है।
राजस्थान हाईकोर्ट का फैसला और कानूनी स्थिति
उल्लेखनीय है कि 27 मई को राजस्थान हाईकोर्ट ने 2013 के इस मामले में 80 वर्षीय आसाराम की दोषसिद्धि और उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा था:
किन आरोपों से मिली थी राहत: हाईकोर्ट ने सामूहिक दुष्कर्म और पॉक्सो के तहत अति-गंभीर यौन उत्पीड़न के आरोपों से उन्हें बरी कर दिया था।
किन धाराओं में सजा बरकरार रही: हालांकि, आईपीसी की धारा 376(2)(एफ) (नाबालिग से दुष्कर्म), धारा 342 (बंधक बनाना), धारा 370(4) (मानव तस्करी), धारा 506 (धमकी), धारा 354(ए) (यौन उत्पीड़न) और पॉक्सो कानून की अन्य धाराओं के तहत उनकी उम्रकैद की सजा कायम रखी गई थी।
मामले का बैकग्राउंड:
25 अप्रैल 2018 को जोधपुर की विशेष अदालत ने अपने आश्रम में पढ़ने वाली एक नाबालिग छात्रा के यौन उत्पीड़न के जुर्म में आसाराम को उम्रकैद की सजा सुनाई थी, जिसके बाद से वे लगातार जेल में बंद हैं। अब सुप्रीम कोर्ट एम्स मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट मिलने के बाद ही उनकी अंतरिम जमानत पर अगला निर्णय लेगा।



