
देहरादून: उत्तराखंड सरकार की महत्वाकांक्षी ‘मुख्यमंत्री एकल महिला स्वरोजगार योजना’ के द्वितीय चरण का राज्य स्तरीय कार्यक्रम बुधवार को कैंट रोड स्थित मुख्य सेवक सदन में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्या ने 212 नई पात्र महिलाओं को सहायता राशि की पहली किस्त स्वीकृत की। इसके अलावा, प्रथम चरण की 276 लाभार्थी महिलाओं को ₹1.20 करोड़ से अधिक की दूसरी किस्त जारी की गई।
यह योजना राज्य की एकल, निराश्रित, परित्यक्ता और विधवा महिलाओं को उनके गांव व क्षेत्र में ही स्वरोजगार से जोड़कर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर और स्वावलंबी बनाने के उद्देश्य से संचालित की जा रही है।
आंकड़ों में योजना की प्रगति
प्रथम चरण (10 फरवरी 2026): 6 जनपदों की 484 महिलाओं को स्वरोजगार के लिए ₹3,45,34,500 की प्रथम किस्त (50%) जारी की गई थी।
द्वितीय चरण (22 जुलाई 2026): अल्मोड़ा, चंपावत, चमोली, हरिद्वार, रुद्रप्रयाग, पिथौरागढ़, उत्तरकाशी और देहरादून की 212 नई पात्र महिलाओं के लिए ₹1,55,44,000 की पहली किस्त (50%) स्वीकृत की गई।
दूसरी किस्त का अवमुक्तन: प्रथम चरण की समीक्षा के बाद देहरादून (182), नैनीताल (71) और टिहरी (23) जनपद की कुल 276 महिलाओं को ₹1,20,76,875 की 30 प्रतिशत द्वितीय किस्त जारी की गई।
योजना का मुख्य आकर्षण: योजना के तहत अधिकतम ₹2 लाख तक की परियोजना लागत पर 75 प्रतिशत का विभागीय अनुदान (सब्सिडी) दिया जाता है, जबकि शेष 25 प्रतिशत अंशदान लाभार्थी महिला का होता है। यह अनुदान कृषि, पशुपालन, ब्यूटी पार्लर, सिलाई और हस्तशिल्प जैसे विभिन्न व्यवसायों के लिए उपलब्ध है।
मुख्यमंत्री व विभागीय मंत्री के संदेश
पुष्कर सिंह धामी (मुख्यमंत्री, उत्तराखंड):
“प्रदेश की एकल व निराश्रित महिलाओं को आत्मनिर्भर और स्वावलंबी बनाना हमारी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इस योजना के माध्यम से राज्य की नारियां अपने ही क्षेत्र में रोजगार अपनाकर आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त हो रही हैं।”
रेखा आर्या (कैबिनेट मंत्री, महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास):
“यह योजना प्रदेश की महिलाओं के जीवन स्तर में गुणात्मक सुधार लाने में मील का पत्थर साबित हो रही है। 75% सब्सिडी के माध्यम से महिलाएं न केवल स्वावलंबी बन रही हैं, बल्कि समाज में एक सम्मानजनक जीवन जी रही हैं।”
संबल पाकर बदली जिंदगी: संघर्ष और हौसले की 4 मिसालें
इस अवसर पर सहायता राशि प्राप्त करने पहुंचीं लाभार्थी महिलाओं ने अपनी प्रेरणादायक कहानियां साझा कीं:
आगरा का प्रसिद्ध पेठा अब दून में (नीलू जैन, कांवली रोड, देहरादून):
2022 में पति की कैंसर से मृत्यु के बाद नीलू पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा था। पहली किस्त मिलने के बाद उन्होंने अपने मायके आगरा की मशहूर रेसिपी का उपयोग कर दून में ही पेठे की मिठाई का सफल कारोबार खड़ा कर लिया।
दूसरों को भी दे रही हैं रोजगार (सुषमा थापा):
कोविड में पति और बाद में 24 साल के बेटे को खोने के बाद सुषमा पूरी तरह टूट चुकी थीं। योजना से मदद मिलने पर उन्होंने हस्तशिल्प और सिलाई का काम शुरू किया। आज वे न केवल खुद कमा रही हैं, बल्कि आसपास की गरीब लड़कियों को भी काम सिखाकर रोजगार दे रही हैं।
कैंसर और परिस्थितियों से जीतकर बनीं आत्मनिर्भर (पूजा सेठी, लक्खी बाग, देहरादून):
ससुराल के अत्याचारों से तंग आकर मायके लौटीं पूजा को 2020 में कैंसर हो गया। बीमारी और संघर्ष के बीच उन्होंने योजना की मदद से सिलाई का व्यवसाय शुरू किया। आज इस कमाई से वे अपना इलाज भी करा रही हैं और सम्मानजनक जीवन जी रही हैं।
“रोडपति से करोड़पति बनकर दिखाऊंगी” (बसंती देवी, पिथौरागढ़):
पारिवारिक संकट के कारण बसंती को अपना चलता हुआ बुटीक छोड़कर अलग होना पड़ा। सालों तक दूसरों की दुकानों में काम करने के बाद अब पहली किस्त मिलते ही वे फिर से अपना बुटीक शुरू करने जा रही हैं। उन्होंने संकल्प जताया कि वे अपनी मेहनत के दम पर एक दिन नया मुकाम हासिल करेंगी।



