Uttarakhand

उत्तराखंड को ऐसे ही जिलाधिकारी की जरूरत, नन्ही परी को बचाने के लिए दो जिलों के DM ने लगा दी जान…

देहरादून : उत्तरकाशी जिले के एक पीलिया पीडित नवजात को देहरादून के निजी अस्पताल ने आयुष्मान कार्ड पर इलाज करने से मना कर दिया। डीएम के हस्तक्षेप के बाद शुरू हुआ नवजात पीडित इलाज। उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले से एक चिंताजनक मामला सामने आया है, जहां पीलिया से पीड़ित एक नवजात शिशु को देहरादून के निजी अस्पताल में आयुष्मान कार्ड के तहत इलाज कराने से इंकार कर दिया गया। अस्पताल प्रबंधन ने इलाज शुरू करने से पहले परिजनों से 25 हजार रूपये जमा करने की मांग करी, जिसके चलते परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने की समस्या सामने खड़ी हो गयी।

देहरादून में डीएम के हस्तक्षेप से नवजात की जान बची
जानकारी के अनुसार, नवजात का जन्म उत्तरकाशी के समुदाय स्वास्थ्य केंद्र के चिन्यालीसौड़ मे हुआ था। जन्म के बाद बच्चे मे पीलिया के लक्षण दिखाई दिए जिसके चलते परिजनों ने उससे पहले जिला अस्पताल लेकर गए, लेकिन हालत मे सुधार न होने के कारण नवजात को हायर सेंटर देहरादून मे रेफर कर दिया गया, जहां देहरादून मे एक निजी अस्पताल मे भर्ती कराया गया,और इलाज को लेकर यह विवाद सामने आया। देहरादून के निजी अस्पताल ने आयुष्मान कार्ड को स्वीकार करने से इंकार करते हुए परिजनों से पहले 25 हज़ार जमा करने की शर्त रखी गयी। और परिजनों के पास इतनी धनराशि नहीं थी कि वे जिसके चलते नवजात शिशु का इलाज शुरू करा पाए, जिस कारण नवजात शिशु का इलाज शुरू नहीं हो पा रहा था जिसके चलते बच्चे की जान खतरे मे आ गयी।

डीएम के हस्तक्षेप से शुरू हुआ इलाज
मामले की जानकारी मिलते ही उत्तरकाशी के प्रशांत आर्य और देहरादून के जिलाधिकारी सबिन बंसल ने तुरंत इस बात को लेकर संज्ञान लिया। और दोनों अधिकारियों ने मानवता का परिचय देते हुए अस्पताल को तत्वकाल इलाज शुरू करने के निर्देश दिए। प्रशासन की इस कारवाई के बाद नवजात का इलाज शुरू हो सका और नवजात की जान बचाई गयी।

समय से डिस्चार्ज न लेने से बढ़ी दिक्क्त
मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. बी. एस. रावत के अनुसार, नवजात के जन्म के बाद परिजन निर्धारित अवधी तक अस्पताल मे नहीं रुके और बिना पूरी निगरानी के बच्चे को घर ले गए, जिसके बाद बच्चे की तबियत बिगड़ी, तो वो बच्चे को लेकर अलग-अलग अस्पतालों मे गए, लेकिन दस्तावेज और डिस्चार्ज पेपर साथ न होने कारण परिवार जानो का दिक्कतों का सामना करना पड़ा।

स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल
इस घटना ने स्वास्थ्य व्यवस्था और आयुष्मान योजना के क्रियान्यवन पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सरकार की महत्वकांक्षी योजना होने के बावजूद अगर जरुरतमंदो को सही समय पर इलाज नहीं मिल पा रहा है, तो यह गंभीर चिंता का विषय है।
यदि समय रहते प्रशासन हस्तक्षेप न करता, तो एक नवजात शिशु की जान भी जा सकती थी। यह घटना स्वास्थ्य सेवाओं मे सुधार और जवाबदेही की सख्त जरूरत को दर्शाती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button