
कानून में संशोधन को मंजूरी मोदी कैबिनेट ने ‘वंदे मातरम’ को राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के बराबर दर्जा देने के लिए राष्ट्रीय सम्मान अपमान निवारण कानून में संशोधन को मंजूरी दी है।
इस फैसले से ‘वंदे मातरम’ का अपमान करना दंडनीय अपराध बन जाएगा, जिसके लिए तीन साल तक की जेल या जुर्माना हो सकता है। बंगाल चुनाव में बड़ी जीत के बाद केंद्र सरकार ने अपने पहले फैसले में ‘वंदे मातरम’ को लेकर बड़ा कदम उठाया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में राष्ट्रीय सम्मान अपमान निवारण कानून में संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है।
इस प्रस्ताव के तहत ‘वंदे मातरम’ को राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के बराबर दर्जा देने की तैयारी है। अभी इस कानून के तहत राष्ट्रीय ध्वज, संविधान और राष्ट्रगान के अपमान या उसमें बाधा डालने पर सजा का प्रावधान है। संशोधन के बाद ‘वंदे मातरम’ को भी इस सूची में शामिल किया जाएगा, जिससे इसके नियमों का पालन न करने पर यह दंडनीय अपराध बन जाएगा।
कानून में बदलाव और सजा का प्रावधान
सरकार वंदे मातरम के 150 वर्ष पूरे होने के मौके पर यह बदलाव कर रही है। इसके लिए कानून की धारा 3 में संशोधन किया जाएगा। इस धारा के अनुसार, अगर कोई व्यक्ति जानबूझकर राष्ट्रगान गाने में बाधा डालता है या उसे रोकता है, तो उसे तीन साल तक की जेल या जुर्माना या दोनों हो सकते हैं। दोबारा अपराध करने पर कम से कम एक साल की सजा का प्रावधान है। संशोधन के बाद यही नियम वंदे मातरम पर भी लागू होंगे। ऐतिहासिक और राजनीतिक महत्व
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पहले भी वंदे मातरम को राष्ट्रगान के बराबर दर्जा देने की वकालत की थी। उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया था कि उसने इस गीत को राजनीति के कारण पीछे रखा।
वंदे मातरम का देश की आजादी की लड़ाई में खास महत्व रहा है। इसे बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने 1882 में अपने उपन्यास ‘आनंदमठ’ में लिखा था, जो उस समय अंग्रेजों के खिलाफ आंदोलन का प्रतीक बना।



