
तकनीक जहां हमारे जीवन को आसान बना रही है, वहीं इसका दुरुपयोग अब गंभीर कानूनी अपराध बनता जा रहा है। करीब 15 दिन पहले हुई मूसलाधार बारिश के दौरान ₹7,000 करोड़ के मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे ‘मिसिंग लिंक’ प्रोजेक्ट को लेकर सोशल मीडिया पर एक बाढ़ सी आ गई थी। लेकिन अब महाराष्ट्र साइबर सेल ने खुलासा किया है कि इनमें से कई वायरल तस्वीरें, वीडियो और रील्स असली नहीं, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से तैयार की गई फर्जी सामग्री थीं।
इस मामले में मुंबई में एक आधिकारिक एफआईआर (FIR) दर्ज की गई है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि एआई के जरिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और सरकार की छवि को जानबूझकर नुकसान पहुंचाने की साजिश रची गई।
कैसे शुरू हुई कानूनी कार्रवाई?
यह कार्रवाई बीजेपी के सोशल मीडिया विंग के पदाधिकारी दीपक म्हापदी की शिकायत पर की गई है।
भ्रम फैलाने की कोशिश: शिकायत के मुताबिक, नियमित सोशल मीडिया मॉनिटरिंग के दौरान कई ऐसे इंस्टाग्राम अकाउंट्स और रील्स मिले, जिनमें एक्सप्रेसवे पर विशाल गड्ढे दिखाने वाली एआई-जेनरेटेड फर्जी तस्वीरें और वीडियो पोस्ट किए गए थे।
आपत्तिजनक टिप्पणियां: एफआईआर में यह भी कहा गया है कि कुछ पोस्ट्स में प्रधानमंत्री के खिलाफ बेहद आपत्तिजनक बातें कही गईं, जबकि एक अन्य ग्राफिक में मुख्यमंत्री की पत्नी अमृता फडणवीस की तस्वीर का गलत इस्तेमाल कर भ्रामक दावे किए गए।
क्या है जमीनी हकीकत?
असल में, भारी बारिश के दौरान भूस्खलन (Landslide) के खतरे को देखते हुए प्रशासन ने एहतियात के तौर पर मिसिंग लिंक के एक हिस्से को कुछ समय के लिए बंद किया था। इसी स्थिति का फायदा उठाकर डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर फर्जी सामग्री के जरिए पैनिक (डर का माहौल) पैदा करने की कोशिश की गई।
सख्त धाराओं में फंसा डिजिटल खेल
महाराष्ट्र साइबर सेल ने इस डिजिटल जालसाजी को बेहद गंभीरता से लिया है। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) और आईटी एक्ट की कई कड़ी धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है, जिनमें शामिल हैं:
जालसाजी (Forgery) और फर्जी खबरें फैलाना।
मानहानि (Defamation) और लोक सेवकों की छवि धूमिल करना।
समाज में बेवजह का तनाव और भ्रम पैदा करना।
मुख्यमंत्री की वो तीखी टिप्पणी…
यह कानूनी एक्शन मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के उस कड़े बयान के बाद सामने आया है, जो उन्होंने बारिश के दौरान दिया था। तब उन्होंने साफ लहजे में कहा था कि महाराष्ट्र के विकास कार्यों और बुनियादी ढांचों को बदनाम करने वाले किसी भी शख्स को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने बेहद तीखे शब्दों में कहा था, “जिन्हें कुत्ते भी नहीं पूछते, वे भी सरकार और मुख्यमंत्री को बदनाम करने की साजिशों में लगे हैं।” अब साइबर सेल की यह एफआईआर उसी सख्त रुख का नतीजा मानी जा रही है।



