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चुनावी जंग अब देश की सबसे बड़ी अदालत में: सतीश उपाध्याय के निर्वाचन के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचे सोमनाथ भारती

नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी (AAP) के वरिष्ठ नेता और पूर्व कानून मंत्री सोमनाथ भारती की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई करने के लिए तैयार हो गया है। सोमनाथ भारती ने साल 2025 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में मालवीय नगर सीट से भाजपा (BJP) नेता सतीश उपाध्याय की जीत को चुनौती दी है।

इस कड़े मुकाबले में सतीश उपाध्याय ने सोमनाथ भारती को 2,131 वोटों के अंतर से हराया था। इस चुनावी नतीजे के खिलाफ सोमनाथ भारती ने पहले दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया था, लेकिन वहां से याचिका खारिज होने के बाद अब उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।

जस्टिस विक्रम नाथ की पीठ करेगी सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ के समक्ष सोमनाथ भारती की इस विशेष अनुमति याचिका (SLP) को सुनवाई के लिए पेश किया गया। पीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए याचिका को स्वीकार कर लिया है और इस पर विस्तृत सुनवाई की मंजूरी दे दी है।

सोमनाथ भारती के मुख्य आरोप क्या हैं?
सोमनाथ भारती ने अपनी याचिका में चुनाव प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 (Representation of the People Act, 1951) के उल्लंघन का आरोप लगाया है:

वोटरों को गाड़ी से लाने का आरोप: याचिका में दावा किया गया है कि मतदान के दिन सतीश उपाध्याय के चुनावी एजेंटों ने नियमों का उल्लंघन करते हुए कारों के जरिए वोटरों को पोलिंग बूथ तक पहुंचाया।

हाईकोर्ट से झटका: दिल्ली हाईकोर्ट ने इन आरोपों को तकनीकी आधार पर पर्याप्त नहीं माना था, जिसके बाद सोमनाथ भारती ने अब शीर्ष अदालत में दलीलें पेश की हैं।

एक और बड़ा फैसला: बंगलूरू के 5 नगर निगमों में चुनाव की समयसीमा बढ़ी

इसी सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की एक अन्य पीठ (जिसमें मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना शामिल थे) ने कर्नाटक से जुड़े एक मामले में बड़ा निर्देश दिया।

दिसंबर 2026 तक बढ़ी मियाद: कोर्ट ने बंगलूरू के पांच नगर निकायों में चुनाव कराने की समयसीमा को बढ़ाकर दिसंबर 2026 कर दिया है। पहले यह समयसीमा 31 अगस्त थी।

क्या है वजह?: कर्नाटक सरकार की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने अदालत को बताया कि राज्य में वर्तमान में एसआईआर (SIR – State Initiative/Administrative Restructuring Process) की प्रक्रिया चल रही है। चूंकि पूरी प्रशासनिक मशीनरी नवंबर तक इस काम में व्यस्त रहेगी, इसलिए चुनाव टालने की मांग की गई थी, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने स्वीकार कर लिया।

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