
दुनिया भर में जलवायु परिवर्तन का असर अब पहले से कहीं ज्यादा साफ दिखाई देने लगा है। लगातार बढ़ता वैश्विक तापमान, मौसम का असामान्य होना, कहीं भारी बारिश तो कहीं लंबा सूखा ये सभी संकेत हैं कि पृथ्वी का पर्यावरण तेजी से बदल रहा है।
कई देशों में बाढ़, जंगलों में आग और सूखे जैसी घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं, जिससे करोड़ों लोगों की जिंदगी और आजीविका प्रभावित हो रही है। वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन पर जल्द नियंत्रण नहीं किया गया तो आने वाले वर्षों में यह संकट और गंभीर रूप ले सकता है।
इसी वजह से संयुक्त राष्ट्र और कई अंतरराष्ट्रीय संगठन दुनिया के देशों से अपील कर रहे हैं कि वे कार्बन उत्सर्जन कम करें और सौर, पवन जैसी नवीकरणीय ऊर्जा को तेजी से बढ़ावा दें।
विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन से निपटना किसी एक देश के बस की बात नहीं है। इसके लिए सभी देशों को मिलकर ठोस और दीर्घकालिक कदम उठाने होंगे, तभी पृथ्वी और आने वाली पीढ़ियों का भविष्य सुरक्षित रह पाएगा।



