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प्रधानमंत्री, मंत्री, अफसर, नेता सब की दौलत की होगी जांच, बालेन शाह का मास्टरस्ट्रोक…

जांच आयोग के अध्यक्ष भी जांच के दायरे में होंगे आयोग के सदस्यों और कर्मचारियों को अपनी संपत्ति का विवरण प्रधानमंत्री कार्यालय में जमा करना होगा जिसे सार्वजनिक किया जाएगा।

नेपाल के शाह सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़क प्रहार करने जा रही है सरकार ने मौजूदा प्रधानमंत्री पूर्व प्रधानमंत्री सभी मंत्री सभी सांसद से लेकर सरकारी और सार्वजनिक पद धारण करने वाले अधिकारियों की संपत्ति की जांच के लिए संपत्ति जांच आयोग को हरी झंडी दे दी है।

नेपाल सरकार की ओर से गठित संपत्ति जांच आयोग ने शुक्रवार से काम करना शुरू कर दिया है, दो सप्ताह पहले गठित इस आयोग का कार्य देश गुरुवार दे रात को राजपत्र में नोटिफाई किया गया।

इसके लिए सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस राजेंद्र कुमार भंडारी की अध्यक्षता में पांच सदस्यों आयोग का गठन किया गया है आयोग में पूर्व मुख्य न्यायाधीश पुरुषोत्तम पराजुली पूर्व न्यायाधीश चंडीराज ढकाल पूरा डीआईजी गणेश और चार्टर्ड अकाउंटेंट प्रकाश लामसल सदस्य हैं।

कौन-कौन है जांच के दायरे में

सरकारी आदेश में कहा गया है कि सार्वजनिक पद पर रहे या सी भर्ती हो चुके पदाधिकारी और उनके परिवार के नाम प्रदेश और विदेश में मौजूद संपत्तियों की जांच की जाएगी। आयोग को देश में लोकतंत्र की बहाली के बाद सभी पूर्व प्रधानमंत्री से लेकर सहायक मंत्री तक और संविधान सभा सदस्य सहित सभी सांसदों की संपत्ति की जांच का अधिकार दिया गया है संवैधानिक निकायों के पूर्व प्रमुख पूरा न्यायाधीश और सह सचिव स्तर के सेनांवृत नेपाली सेवा अधिकारी भी जांच के दायरे में आएंगे। इसके डायरी में नेपाल के पूर्व पीएम केपी शर्मा ओली , शेर बहादुर देउबा पुष्प कमल दहल प्रचंड डॉ बाबूराम भट्टराई जगन्नाथ खनाल और इसके सभी परिवार वाले तथा रिश्तेदार को भी रखा गया है।

इसी तरह प्रदेश के राज्यपाल मुख्यमंत्री मंत्री विधायक से लेकर प्रदेश स्तर पर राजनीति तथा संवैधानिक नियुक्ति पाने वाले अधिकारी भी जांच के दायरे में होंगे स्थानीय तरह के प्रमुख अध्यक्ष उपाध्यक्ष तथा जिला समन्वयी समिति के पदाधिकारी भी जांच के अधीन होंगे नोटिफिकेशन के अनुसार 100 सचिव से लेकर मुख्य सचिव तक सभी उच्च पदाधिकारी जांच के बारे में होंगे सिविल सेवा पुलिस सेवा सशस्त्र पुलिस सेवा इंटेलिजेंस ब्यूरो और अन्य सेवाओं के अधिकारी भी जांच के बारे में शामिल होंगे। विदेश स्थित नेपाली दूतावास और कूटनीतिक नियमों के प्रमुख और कर्मचारी भी जांच के अधीन होंगे यदि किसी उपसचिव स्टार के अधिकारी ने कार्यालय प्रमुख के रूप में कार्य किया है तो वह भी जांच में शामिल होगा।

नेपाल राष्ट्रीय बैंक के गवर्नर से लेकर 100 सचिव स्तर तक लेकर कर्मचारी सरकारी बैंक वित्तीय संस्थान विश्वविद्यालय एवं अन्य सार्वजनिक स्थानों के उच्च अधिकारी भी जांच के दायरे में आएंगे। आयोग सार्वजनिक संस्थाओं के बोर्ड के अध्यक्ष और सदस्यों की भी जांच करेगी जांच के दौरान संबंधित व्यक्तियों के परिवार और संपत्ति तक भी पहुंच बनाई जाएगी, चाहे वह देश में हो या विदेश में छिपाई गई हो।

यह है जांच के दायरे से बाहर

राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति का पद सूची में शामिल नहीं है लेकिन उनके सलाहकार निधि सचिव और अन्य सहयोगी पदाधिकारी जांच के दायरे में आएंगे चाहे वह राज्य को उसके सुविधा लेते हो या नहीं दोनों प्रकार के अधिकारी की जांच होगी। जांच से बाहर रहने वाले की सूची में पूर्व राष्ट्रपति तथा उपराष्ट्रपति का पद भी शामिल है, लेकिन उनके सचिवालय के कार्यकरता अधिकारी जांच के दायरे में शामिल होंगे इसी तरह सेवा के बहाल वाले अधिकारी को जांच के दायरे से बाहर रखा गया है लेकिन अवकाश प्राप्त सैन्य अधिकारियों को इसमें शामिल किया गया है।

इसी तरह वर्तमान न्यायाधीशों को इस जांच की डायरी से बाहर रखकर सभी रिटायर्ड जज और उनके परिवार वालों के संपत्तियों की जांच की जाएगी वर्तमान न्यायाधीश सी के पदाधिकारी और आयोग के अधिकार क्षेत्र से बाहर के मामलों को संबंधित अधिकारियों जैसे न्याय परिषद या रक्षा मंत्रालय को भेजा जाएगा जांच का पहला चरण वर्ष 2006 से लेकर 31 मार्च 2026 तक की अवधि तक को कवर करेगा। इसमें वर्तमान प्रधानमंत्री मंत्री मंत्री सांसद और अन्य पदाधिकारी शामिल होंगे इसके बाद पूर्व प्रधानमंत्री और 2006 के बाद पूर्व प्रधानमंत्री और 2006 के बाद नहीं सरकारों के पदाधिकारी की जांच होगी पहले चरण आयोग 1988 से 2008 तक सार्वजनिक पद पर रहे व्यक्तियों की संपत्ति की जांच करेगा।

कैसे होगी संपत्ति की जांच

जांच के दौरान आयोग पहले संपत्ति का विवरण जांच आएगा फिर उसकी वैधता स्रोत और बढ़ोतरी का विश्लेषण करेगी यदि असामान्य रूप से अधिक संपत्ति पाई गई तो आगे गहन जांच की जाएगी। विशेष रूप से उन व्यक्तियों पर ध्यान दिया जाएगा जिन पर भ्रष्टाचार, बिचौलियापन, अनुशासनात्मक कार्यवाही या शिकायतें रही है कर भूमि और यातायात जैसे सीधे जनता से जुड़े विभागों को उच्च प्राथमिकता दी गई है यदि जांच में अवैध संपत्ति की पुष्टि होती है तो संबंधित निकाय को कानूनी कार्रवाई के लिए सिफारिश की जाएगी। आयोग इस बार रिपोर्ट प्रस्तुत करेगा किसी एक व्यक्ति की जांच पूरी होती सरकार को सिफारिश भेजी जाएगी सरकार को 45 दिनों के भीतर कार्रवाई शुरू करनी होगी।

कोई भी कर सकता है शिकायत

आयोग को स्वतंत्र निष्पक्ष और पेशेवर तरीके से काम करने का निर्देश दिया गया है, यह लिखित मौखिक डिजिटल और सोशल मीडिया के माध्यम से शिकायत स्वीकार कर सकेगा शुरुआत में आयु 30 दिनों के समय सीमा के साथ शिकायत आमंत्रित करेगा शिकायतकर्ता की पहचान गोपनीय रखी जाएगी, आयोग विदेश में छुपाई गई संपत्तियों की जांच के कूटनीतिक मिशनों, इंटरपोल और अन्य एजेंसी से भी सहयोग ले सकेगा।

यदि आयोग के पदाधिकारी कानून उल्लंघन क्षमता या अनुचित आचरण में लिप्त पाए जाते हैं। तो सरकारों ने पद से किसी भी समय हटा सकती है आयोग में 38 कर्मचारी तैनात किए जाएंगे जिनमें प्रशासन पुलिस न्याय इंटेलिजेंस और आईटी क्षेत्र के कर्मचारी शामिल होंगे आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों की राज्य मंत्री स्तर की सुविधा और सुरक्षा मुहैया कराई गई है काम में सहभागी सरकारी कर्मचारियों को नियमित वेतन के अलावा अतिरिक्त वेतन दिया जाएगा, आयोग का कार्यकाल 1 वर्ष का हो का होगा और आवश्यक व्यवस्थाएं प्रधानमंत्री कार्यालय करेगा।

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