
रविवार को जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ‘मन की बात’ के 134वें एपिसोड में देशवासियों से मुखातिब हुए, तो उनकी बातों में एक सरोकार भी था और अपनापन भी। उन्होंने भीषण गर्मी से बचने के घरेलू नुस्खों से लेकर देश के लिए पसीना बहाने वाले खिलाड़ियों तक, हर उस मुद्दे पर बात की जो सीधे हमसे और आपसे जुड़ा है। पीएम मोदी ने साफ कहा कि समाज में चुपचाप बदलाव लाने वाले असल हीरो वही लोग हैं, जो निस्वार्थ भाव से दूसरों की सेवा में जुटे हैं। हमें उनसे न सिर्फ सीखना चाहिए, बल्कि खुद भी छोटे-छोटे सामाजिक कामों में हाथ बंटाना चाहिए।
गर्मी का मौसम और आमों की मिठास
इस कड़कती धूप के बीच पीएम मोदी ने देश के अलग-अलग कोनों में मिलने वाले आमों का जिक्र कर मुंह में पानी ला दिया। उन्होंने महाराष्ट्र के हापुस (अल्फांसो), गुजरात के केसर, यूपी के दशहरी और काशी के लंगड़ा आम की खूबियां गिनाईं। साथ ही, उन्होंने उन किसानों की पीठ थपथपाई जो अपनी मेहनत से देश की खेती-बाड़ी और अर्थव्यवस्था को मजबूत कर रहे हैं।
देसी पेय: सिर्फ प्यास नहीं बुझाते, संस्कृति भी जोड़ते हैं
बढ़ते पारे को देखते हुए प्रधानमंत्री ने सभी से अपना ख्याल रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि धूप में निकलने से बचें, पानी पीते रहें और सरकारी गाइडलाइंस को हल्के में न लें।
मजेदार बात यह रही कि उन्होंने गर्मी से निपटने के लिए भारत के पारंपरिक और देसी ड्रिंक्स की एक लंबी लिस्ट साझा की, जो हमारी विविधता को दर्शाती है:
उत्तर भारत: आम पन्ना, सत्तू का शरबत (बिहार-झारखंड)
पंजाब-हरियाणा: ठंडी-ठंडी लस्सी
गुजरात-राजस्थान: छाछ का स्वाद
कोंकण और गोवा: कोकम शरबत और सोलकढ़ी
दक्षिण भारत: पनकम, नीर मोर और सांबरम
पीएम ने कहा कि ये सिर्फ ड्रिंक्स नहीं हैं, बल्कि ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ की उस भावना की मिसाल हैं, जो सेहत भी देती है और हमें आपस में जोड़ती भी है।
जल संरक्षण: बचपन की यादों को नया जीवन
पानी की किल्लत से निपटने के लिए पीएम मोदी ने उन लोगों की तारीफ की जो सामूहिक रूप से नदियों, तालाबों और कुओं को बचाने में जुटे हैं। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि अपने बचपन की यादों से जुड़े पानी के स्रोतों को दोबारा जिंदा देखना एक अलग ही सुकून देता है। यह काम सिर्फ सरकार का नहीं, बल्कि हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी (जनभागीदारी) है।
खेल के मैदान से आई खुशखबरी
पीएम ने रांची में हुई नेशनल सीनियर एथलेटिक्स चैंपियनशिप का जिक्र करते हुए देश के युवा एथलीटों का हौसला बढ़ाया। इस प्रतियोगिता में चार नए नेशनल रिकॉर्ड बने। उन्होंने गुरिंदरवीर सिंह, विशाल टीके, तेजस्विन शंकर, देव मीणा, कुलदीप कुमार और अनीमेष कुजूर जैसे होनहार खिलाड़ियों को उनकी शानदार कामयाबियों के लिए बधाई दी।
आखिर में बात पते की: प्रधानमंत्री के इस पूरे संबोधन का लब्बोलुआब यही था कि जब देश का आम नागरिक समाज सेवा, पर्यावरण और खेल जैसे क्षेत्रों में अपना योगदान देता है, तभी एक मजबूत राष्ट्र का निर्माण होता है।



