
‘विकसित भारत-2047’ के विजन को धरातल पर उतारने की कवायद
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सचिवालय में एक महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता की। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत-2047’ के महा-संकल्प को सिद्ध करने के लिए उत्तराखंड को अपनी रफ्तार बढ़ानी होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के बुनियादी ढांचे (Infrastructure) को मजबूत करना और परियोजनाओं को समय पर पूरा करना उनकी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसी क्रम में उन्होंने राज्य की ₹6,940 करोड़ की 12 सबसे महत्वपूर्ण अवसंरचना परियोजनाओं की समीक्षा की।हर 10 दिन में होगी मॉनिटरिंग, लापरवाही पर गिरेगी गाज
विकास कार्यों में सरकारी सुस्ती और विभागीय तालमेल की कमी को दूर करने के लिए मुख्यमंत्री ने एक सख्त निगरानी तंत्र (Monitoring System) लागू करने के निर्देश दिए हैं:
इन सभी 12 बड़ी परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा खुद मुख्यमंत्री प्रत्येक माह करेंगे। मुख्य सचिव (Chief Secretary) को हर 10 दिन में इन कार्यों की अद्यतन स्थिति की समीक्षा करने की जिम्मेदारी दी गई है। मुख्यमंत्री ने सख्त लहजे में चेतावनी दी कि यदि किसी भी स्तर पर अनावश्यक देरी पाई गई, तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
इन 12 प्रमुख रणनीतिक व जनोपयोगी परियोजनाओं पर रहा फोकस
बैठक के दौरान जिन महत्वपूर्ण परियोजनाओं की वर्तमान स्थिति और भौतिक प्रगति को परखा गया, उनमें परिवहन, बिजली, सीमा सुरक्षा और राष्ट्रीय राजमार्ग से जुड़े कार्य शामिल हैं: रामनगर आईएसबीटी (ISBT), रानीखेत बस टर्मिनल, तथा ताड़ीखेत डिपो एवं कार्यशाला का निर्माण कार्य। बनबसा और रुद्रप्रयाग में बन रहे नए विद्युत उपकेंद्र (Substations), जो क्षेत्र की बिजली आपूर्ति को सुदृढ़ करेंगे। चारधाम सड़क परियोजनाएं, भारत-चीन सीमा को जोड़ने वाला अस्कोट-लिपुलेख मार्ग, माणा पास सड़क परियोजना तथा हरिद्वार और काशीपुर क्षेत्रों में चल रहे राष्ट्रीय राजमार्ग (NH) के निर्माण कार्य।
वन, पर्यावरण और भूमि अधिग्रहण के पेंच सुलझाने के निर्देश
परियोजनाओं की राह में आने वाले प्रशासनिक रोड़ों को हटाने के लिए मुख्यमंत्री ने कड़े निर्देश दिए। बैठक में भूमि हस्तांतरण, वन एवं पर्यावरणीय स्वीकृतियां (Forest and Environment Clearances), भूमि अधिग्रहण (Land Acquisition) और प्रभावितों को क्षतिपूर्ति भुगतान से जुड़े लंबित मामलों पर गंभीर मंथन हुआ।
मुख्यमंत्री ने जिलाधिकारियों (DM) को निर्देशित किया कि वे अपने-अपने जिलों में लंबित इन मामलों की व्यक्तिगत रूप से निगरानी (Personal Monitoring) करें और अंतर्विभागीय समन्वय स्थापित कर फाइलों का त्वरित निस्तारण करें।
पर्यटन, निवेश और रोजगार को मिलेगी नई रफ्तार
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अंत में कहा कि ये परियोजनाएं केवल कंक्रीट का ढांचा नहीं हैं, बल्कि यह उत्तराखंड के आर्थिक विकास की रीढ़ हैं। सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण सीमांत क्षेत्रों की सड़कें, सुगम परिवहन और सुदृढ़ बिजली व्यवस्था के समय पर पूरे होने से राज्य में, पर्यटन और तीर्थयात्रा को नया आयाम मिलेगा। स्थानीय व्यापार और औद्योगिक निवेश को बढ़ावा मिलेगा। उत्तराखंड के युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।


