
हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की बढ़ती सैन्य साख को दिखाते हुए भारतीय नौसेना एक बड़े बहुराष्ट्रीय रक्षा अभ्यास की मेजबानी के लिए पूरी तरह तैयार है। दक्षिणी नौसेना कमान आगामी 20 से 23 जुलाई तक कोच्चि में ‘ऑपरेशन सदर्न रेडीनेस 26-2’ का आयोजन करने जा रही है।
चार दिनों तक चलने वाले इस हाई-टेक प्रशिक्षण कार्यक्रम में कंबाइंड मैरीटाइम फोर्सेज (CMF) से जुड़े 40 से अधिक देशों के नौसैनिक और सैन्य अधिकारी हिस्सा लेंगे। यह आयोजन भारतीय नौसेना के नेतृत्व वाले ‘कंबाइंड टास्क फोर्स 154’ (CTF 154) के तहत किया जा रहा है।
क्या है इस मेगा सैन्य अभ्यास का मुख्य उद्देश्य?
CMF दुनिया का एक प्रतिष्ठित बहुराष्ट्रीय समुद्री संगठन है, जिसमें 40 से ज्यादा देश शामिल हैं। भारत इस संगठन के साथ मिलकर क्षेत्रीय सुरक्षा को मजबूत करने में लगातार बड़ी भूमिका निभा रहा है। इस साझा युद्धाभ्यास का मुख्य लक्ष्य है:
- सामूहिक समुद्री सुरक्षा: समुद्र में बढ़ते खतरों से निपटने के लिए सदस्य देशों के बीच तालमेल बढ़ाना।
- बेहतरीन तौर-तरीकों का आदान-प्रदान: विभिन्न देशों की नौसेनाओं के व्यावहारिक अनुभवों और तकनीकों को एक-दूसरे के साथ साझा करना।
इन आधुनिक और व्यावहारिक विषयों पर दी जाएगी ट्रेनिंग
चार दिनों के इस गहन प्रशिक्षण में केवल क्लासरूम की पढ़ाई नहीं होगी, बल्कि नौसैनिकों को अत्याधुनिक तकनीकों से रू-ब-रू कराया जाएगा:
- हाई-टेक सिमुलेटर और ड्रोन तकनीक: प्रशिक्षण के दौरान समुद्री मानवरहित प्रणालियों (Uncrewed Systems/Drones), समुद्री क्षेत्र की जागरूकता और त्वरित सूचना साझा करने पर विशेष जोर रहेगा।
- एंटी-स्मगलिंग ऑपरेशंस: समुद्र के रास्ते होने वाली नशीली दवाओं (ड्रग्स) की तस्करी को रोकने और विषम सुरक्षा खतरों से निपटने की रणनीतियों पर काम होगा।
- लाइव ऑन-बोर्ड ट्रेनिंग: विदेशी नौसैनिकों को भारतीय नौसेना के युद्धपोतों पर ले जाया जाएगा, जहां उन्हें जहाजों पर अचानक चढ़ने की प्रक्रिया (बोर्डिंग प्रोसीजर), समुद्र में जीवन रक्षा, आग बुझाने और डैमेज कंट्रोल (नुकसान नियंत्रण) का व्यावहारिक कड़ा अभ्यास कराया जाएगा।
वैश्विक मंच पर बढ़ेगा भारतीय नौसेना का दबदबा
रक्षा प्रवक्ता के अनुसार, यह आयोजन वैश्विक स्तर पर भारतीय नौसेना के आधुनिक प्रशिक्षण ढांचे, एडवांस सिमुलेटरों और पेशेवर विशेषज्ञता का प्रदर्शन करेगा। इस साझा अभ्यास से मित्र देशों के साथ भारत के सामरिक संबंध और मजबूत होंगे तथा कोच्चि स्थित ‘दक्षिणी नौसेना कमान’ की पहचान दुनिया भर में एक प्रमुख और विश्वस्तरीय नौसैनिक प्रशिक्षण केंद्र के रूप में और पुख्ता होगी।



