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कोर्टरूम में रील बनाई तो खैर नहीं! वकीलों के लिए बार काउंसिल ने जारी की डिजिटल आचार संहिता

नई दिल्ली: अगर आप वकील, लॉ स्टूडेंट या इंटर्न हैं और अदालत परिसर में सोशल मीडिया रील या शॉर्ट वीडियो बनाने का शौक रखते हैं, तो अब सावधान हो जाइए। बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने वकीलों के डिजिटल आचरण को लेकर एक कड़ा सर्कुलर जारी किया है। इसके तहत कोर्टरूम या कोर्ट परिसर के भीतर रील बनाने पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ अब सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

BCI ने देश के सभी राज्यों की बार काउंसिल को इन दिशा-निर्देशों को तुरंत प्रभाव से लागू करने का आदेश दिया है, ताकि डिजिटल माध्यमों में भी न्यायपालिका की गरिमा बनी रहे।

नए डिजिटल नियमों में क्या-क्या है खास?
बार काउंसिल ने साफ किया है कि वकीलों का पेशेवर आचरण सिर्फ कोर्टरूम तक सीमित नहीं है, बल्कि सोशल मीडिया पर भी उन्हें मर्यादा बनाए रखनी होगी:

भ्रामक और अपमानजनक पोस्ट पर रोक: अदालत या न्यायिक प्रणाली के खिलाफ कोई भी आपत्तिजनक, भ्रामक या मानहानिकारक पोस्ट करने पर पूरी तरह पाबंदी होगी।

गोपनीयता का सम्मान: मुवक्किल (Client) से जुड़ी निजी जानकारियां और कोर्ट की गोपनीय कार्यवाही को सोशल मीडिया पर सार्वजनिक नहीं किया जा सकेगा।

एआई (AI) का नैतिक उपयोग: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक से तैयार किसी भी ऐसी सामग्री के इस्तेमाल पर रोक रहेगी जो अनैतिक हो या तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश करती हो।

लिखित घोषणापत्र (Undertaking): अब वकीलों को अपने नामांकन (Enrollment) या रिन्यूअल के समय इन नियमों का पालन करने के लिए एक लिखित शपथ-पत्र देना होगा।

निगरानी के लिए तैनात होंगे ‘नोडल अधिकारी’
नियमों को सख्ती से लागू करने और उन पर नजर रखने के लिए एक विशेष व्यवस्था की गई है:

सोशल मीडिया एथिक्स नोडल अधिकारी: सभी बार काउंसिल और बार एसोसिएशनों में नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की जाएगी, जो डिजिटल आचार संहिता के उल्लंघन से जुड़ी शिकायतों की जांच और निगरानी करेंगे।

क्या सोशल मीडिया पर कुछ भी पोस्ट करने की इजाजत नहीं है?
ऐसा नहीं है। BCI ने साफ किया है कि कानूनी शिक्षा (Legal Education) से जुड़े छोटे वीडियो, ज्ञानवर्धक रील या पॉडकास्ट साझा करने की अनुमति रहेगी। बशर्ते वे पूरी तरह तथ्यात्मक, संतुलित और मर्यादित हों। उनमें किसी भी तरह के भ्रामक दावे या गोपनीयता का उल्लंघन नहीं होना चाहिए।

यह कदम सोशल मीडिया के इस दौर में कानूनी पेशे की गंभीरता, साख और गरिमा को बनाए रखने के लिए बेहद जरूरी माना जा रहा है।

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