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मानसून सत्र से पहले सर्वदलीय बैठक से विपक्ष का वॉकआउट, महुआ मोइत्रा ने उठाए सवाल…

संसद के मानसून सत्र की शुरुआत से ठीक एक दिन पहले देश की राजनीतिक सरगर्मी चरम पर पहुंच गई है। सरकार द्वारा बुलाई गई पारंपरिक सर्वदलीय बैठक में उस वक्त बड़ा हंगामा हो गया, जब कांग्रेस, सपा और टीएमसी समेत समूचे विपक्ष ने एकजुट होकर बैठक का बहिष्कार (वॉकआउट) कर दिया।

यह हंगामा एक गैर-मान्यता प्राप्त दल के सांसदों को बैठक में शामिल किए जाने के विरोध में हुआ। बता दें कि संसद का यह महत्वपूर्ण मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होकर 13 अगस्त 2026 तक चलेगा।

महुआ मोइत्रा ने खोला मोर्चा: “बागी सांसदों को न्योता क्यों?”

विपक्ष की ओर से मोर्चा संभालते हुए तृणमूल कांग्रेस (TMC) की सांसद महुआ मोइत्रा ने सरकार और संसदीय कार्य मंत्रालय पर तीखे सवाल दागे। उन्होंने वॉकआउट की वजह साफ करते हुए कहा:

“आज कांग्रेस, सपा, डीएमके, जेएमएम, आप, नेशनल कॉन्फ्रेंस, लेफ्ट और शिवसेना (UBT) समेत पूरा विपक्ष इस बैठक से बाहर आ गया है। इसकी वजह यह है कि कथित एनसीपीआई (NCPI), जो कि एक गैर-मान्यता प्राप्त दल है, उसे इस आधिकारिक बैठक में शामिल किया गया।”

महुआ मोइत्रा के 3 बड़े सवाल:

सांसदों की संख्या पर विवाद: टेबल ऑफिस के दस्तावेजों में टीएमसी (AITC) के सांसदों की संख्या 28 दिखाई गई है, जिसमें 20 बागी सांसद भी शामिल हैं।

अयोग्यता का मामला लंबित: इन 20 बागी सांसदों के किसी अन्य दल में विलय को अभी तक लोकसभा अध्यक्ष (Speaker) ने मंजूरी नहीं दी है और इनकी अयोग्यता याचिकाएं अभी भी पेंडिंग हैं।

संसदीय नियमों का उल्लंघन: 91वें संविधान संशोधन के नियमों के तहत किसी अलग गुट को मान्यता नहीं दी जा सकती। ऐसे में संसदीय कार्य मंत्री ने इन बागी सांसदों को किस आधार पर आमंत्रित किया?

24 दिन, 19 बैठकें: क्या हैं मानसून सत्र के मायने?

केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर जानकारी दी कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सत्र को मंजूरी दे दी है।

सत्र की अवधि: 20 जुलाई से 13 अगस्त 2026
कुल बैठकें: 4 हफ्तों में कुल 19 बैठकें होंगी
मुख्य एजेंडा: परिसीमन विधेयक और राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर चर्चा

सत्र के दौरान सरकार कई महत्वपूर्ण विधेयकों (जैसे परिसीमन विधेयक) को पास कराने की कोशिश करेगी, वहीं विपक्ष जेपीसी (JPC) रिपोर्ट और बागी सांसदों के मुद्दे पर सरकार को घेरने के लिए पूरी तरह तैयार है। साफ है कि आगामी 4 हफ्ते संसद में भारी हंगामेदार रहने वाले हैं।

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