
नई दिल्ली: दुष्कर्म के मामले में जेल में बंद आसाराम की अंतरिम जमानत याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। खराब स्वास्थ्य का हवाला देकर कुछ समय के लिए जेल से बाहर आने की आसाराम की गुहार पर शीर्ष अदालत ने राजस्थान सरकार को उनकी वास्तविक मेडिकल स्थिति जांचने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा कि सरकार यह स्पष्ट करे कि क्या आसाराम की सेहत वाकई इतनी गंभीर है कि उन्हें इलाज के लिए अंतरिम राहत दी जाए।
‘3 महीने पहले काशी-अयोध्या में पैदल घूम रहे थे आसाराम’
सुनवाई के दौरान राजस्थान सरकार का पक्ष रखते हुए देश के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत के सामने एक दिलचस्प और महत्वपूर्ण तथ्य रखा:
सरकार का दावा: सॉलिसिटर जनरल ने कोर्ट को बताया कि फिलहाल आसाराम की तबीयत ठीक है। उन्होंने दलील दी कि करीब तीन महीने पहले ही आसाराम अयोध्या और काशी विश्वनाथ के दौरे पर थे, जहां उन्होंने पैदल घूमकर दर्शन किए थे।
ताजा रिपोर्ट पेश करने का भरोसा: इसके बावजूद, उन्होंने अदालत को आश्वस्त किया कि राज्य सरकार जेल और मेडिकल अधिकारियों से संपर्क कर आसाराम की बिल्कुल ताजा हेल्थ रिपोर्ट और आवश्यक जानकारी जल्द ही कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत करेगी।
“अगर हालत गंभीर है, तो हम अनहोनी नहीं चाहते” : सुप्रीम कोर्ट
अदालत का मानवीय रुख:
मामले की सुनवाई कर रही सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने अपना रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि यदि मेडिकल रिपोर्ट से यह साबित होता है कि आसाराम की हालत वास्तव में नाजुक है, तो अदालत नहीं चाहती कि जेल के भीतर उनके साथ कोई अनहोनी हो। अगर वाकई जरूरत हुई, तो सिर्फ और सिर्फ उचित इलाज के उद्देश्य से एक बेहद सीमित अवधि के लिए अंतरिम जमानत देने पर विचार किया जा सकता है।
21 जुलाई को होगी अगली सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने इस पूरे मामले में राजस्थान सरकार को 21 जुलाई, 2026 तक अपनी विस्तृत रिपोर्ट और जवाब दाखिल करने का अंतिम निर्देश दिया है। सरकार की इस आधिकारिक रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद ही अदालत आसाराम की अंतरिम जमानत पर कोई अंतिम फैसला सुनाएगी।
मामले का बैकग्राउंड:
गौरतलब है कि साल 2013 में जोधपुर स्थित अपने आश्रम में एक नाबालिग लड़की के साथ यौन उत्पीड़न के आरोप में आसाराम को 1 सितंबर 2013 को गिरफ्तार किया गया था। अप्रैल 2018 में पोक्सो (POCSO) की विशेष अदालत ने उन्हें दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी, जिसके बाद से वे लगातार जेल की सलाखों के पीछे हैं।



