
कोलकाता: पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने नीट (NEET) पेपर लीक विरोधी प्रदर्शन के दौरान मीडियाकर्मियों और पत्रकारों पर हुए हिंसक हमले की कड़ी निंदा की है। विधानसभा में बयान देते हुए मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि घटना में शामिल 70 उपद्रवियों की पहचान कर ली गई है और राज्य में हाल ही में पारित ‘गुंडा अधिनियम’ (Goonda Act) के तहत उनके खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
इस मामले में कोलकाता पुलिस ने अब तक कुल छह एफआईआर (FIR) दर्ज की हैं।
प्रदर्शन में असमाजिक तत्वों की घुसपैठ
विधानसभा में घटना का ब्यौरा देते हुए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने स्पष्ट किया कि वामपंथी और अति-वामपंथी छात्र संगठनों द्वारा निकाले गए मार्च में उपद्रवियों ने घुसपैठ की थी:
उपद्रवियों की पहचान: मुख्यमंत्री ने बताया कि लगभग 70 ऐसे असामाजिक तत्वों की पहचान हुई है जिनका छात्रों के वास्तविक विरोध प्रदर्शन से कोई लेना-देना नहीं था।
मुख्य आरोपियों के नाम: सीएम ने पांच प्रमुख उपद्रवियों—राजबागान के अफरोज, किडरपुर के नाहेद, इकबालपुर के तनवीर व निजाम और वाटगंज के राहुल जमाल का नाम लेते हुए बताया कि ये लोग एस्प्लेनेड में हुई हिंसा में सीधे तौर पर शामिल थे।
पत्रकारों को बनाया निशाना: उपद्रवियों ने शुरुआत में पानी की बोतलें और जूते फेंके, जिसके बाद उन्होंने ड्यूटी पर तैनात पत्रकारों पर हमला कर दिया। इस हिंसा में 6 पत्रकार गंभीर रूप से घायल हुए, जिनका सरकारी अस्पताल में इलाज किया गया।
‘संयम की वजह से नाकाम हुई उपद्रवियों की साजिश’
मुख्यमंत्री ने कोलकाता पुलिस के धैर्य और संयम की सराहना करते हुए कहा कि पुलिस को स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि जब तक स्थिति पूरी तरह नियंत्रण से बाहर न हो, बल प्रयोग न किया जाए:
“लोकतांत्रिक देश में हर किसी को शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने का अधिकार है। उपद्रवी चाहते थे कि पुलिस लाठीचार्ज करे या आंसू गैस के गोले छोड़े ताकि माहौल और बिगड़े, लेकिन कोलकाता पुलिस ने अत्यंत संयम बरतते हुए उनकी इस साजिश को नाकाम कर दिया।”
— शुभेंदु अधिकारी, मुख्यमंत्री (पश्चिम बंगाल)
गुंडा एक्ट के तहत होगी गैर-जमानती कार्रवाई
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि मीडिया लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है और पत्रकारों पर हमला किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। दर्ज की गई सभी 6 प्राथमिकियों में नए ‘गुंडा अधिनियम’ की सख्त धाराएं जोड़ी गई हैं, जिससे आरोपियों के खिलाफ त्वरित और कठोर दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।



