
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आगामी इंडोनेशिया यात्रा भारत और इंडोनेशिया के ऐतिहासिक संबंधों को एक नई और अभूतपूर्व ऊंचाई पर ले जाने वाली साबित हो सकती है। इस हाई-प्रोफाइल दौरे के दौरान दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग, समुद्री सुरक्षा, महत्वपूर्ण खनिजों (क्रिटिकल मिनरल्स) की सप्लाई चेन और एडवांस टेक्नोलॉजी पार्टनरशिप से जुड़े कई बड़े समझौतों पर अंतिम मुहर लगने की उम्मीद है। रणनीतिक जानकारों का मानना है कि इन फैसलों से पूरे हिंद-प्रशांत (इंडो-पैसिफिक) क्षेत्र में भारत की ताकत और स्थिति और भी ज्यादा मजबूत हो जाएगी।
सबांग बंदरगाह का संयुक्त विकास: भारत का सबसे बड़ा ‘मास्टरस्ट्रोक’
प्रधानमंत्री मोदी की इस यात्रा का जो सबसे बड़ा और दूरगामी परिणाम माना जा रहा है, वह है इंडोनेशिया के सबांग बंदरगाह (Sabang Port) का संयुक्त रूप से विकास करना। यह बंदरगाह सामरिक दृष्टि से दुनिया के सबसे व्यस्त और संवेदनशील समुद्री व्यापारिक मार्ग यानी मलक्का जलडमरूमध्य (Strait of Malacca) के बिल्कुल मुहाने पर स्थित है।
इस रूट की अहमियत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पूरी दुनिया का लगभग 22 प्रतिशत वैश्विक व्यापार और 29 प्रतिशत समुद्री तेल इसी मलक्का जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है। सबांग बंदरगाह के विकास में भारत की हिस्सेदारी से पूर्वी हिंद महासागर में हमारी नौसेना और मर्चेंट शिपिंग की मौजूदगी बेहद मजबूत होगी, लॉजिस्टिक्स का खर्च घटेगा और इंडो-पैसिफिक में भारत की भूमिका एक ‘गेम चेंजर’ की तरह उभरेगी।
रक्षा क्षेत्र में लगी छलांग: ब्रह्मोस मिसाइल का बढ़ेगा कुनबा
भारत और इंडोनेशिया के बीच मिलिट्री और डिफेंस टाई-अप को नई धार देने के लिए भारत की शान ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल की अतिरिक्त खरीद पर भी दोनों देशों के बीच अंतिम सहमति बन सकती है। रक्षा सूत्रों के हवाले से खबर है कि इंडोनेशिया पहले चरण में भारत से एक अतिरिक्त ब्रह्मोस बैटरी खरीद सकता है, जिसे आगे चलकर तीन बैटरियों तक विस्तारित करने की योजना है। खास बात यह है कि भारत केवल मिसाइल बेचेगा नहीं, बल्कि इन घातक मिसाइल प्रणालियों की तैनाती में भी इंडोनेशियाई सेना की पूरी मदद करेगा।
स्वदेशी ‘अस्त्र’ मिसाइल का दीवाना हुआ इंडोनेशिया
इस यात्रा का एक और बड़ा आकर्षण इंडोनेशिया द्वारा भारत में ही बनी स्वदेशी अस्त्र (Astra) बियॉन्ड विजुअल रेंज एयर-टू-एयर मिसाइल (BVRAAM) को खरीदने का बड़ा फैसला हो सकता है।
भारतीय तकनीक पर बढ़ा भरोसा: ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान भारतीय वायुसेना की ताकत और हमारे वैज्ञानिकों की स्वदेशी रक्षा तकनीक का लोहा पूरी दुनिया ने माना था, जिसके बाद से भारतीय वेपन सिस्टम पर अंतरराष्ट्रीय देशों का भरोसा तेजी से बढ़ा है।
इंडोनेशियाई वायुसेना के पास शक्तिशाली Su-30 (सुखोई) लड़ाकू विमानों का बेड़ा है। भारत के रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) द्वारा विकसित की गई और हाल ही में स्वदेशी रेडियो फ्रीक्वेंसी सीकर के साथ सफल परीक्षण पूरी कर चुकी इस 100 किलोमीटर से अधिक मारक क्षमता वाली ‘अस्त्र’ मिसाइल को सुखोई विमानों में बेहद आसानी से फिट (इंटीग्रेट) किया जा सकता है।
खनिजों की जंग में चीन को टक्कर: स्टील और निकेल में बड़ा निवेश
भविष्य की जरूरतों को देखते हुए भारत अब इंडोनेशिया में स्टील, निकेल और रेयर अर्थ मैग्नेट से जुड़े बड़े मैन्युफैक्चरिंग प्लांट लगाने और निवेश करने की तैयारी में है। इस बड़ी साझेदारी का सीधा मकसद इलेक्ट्रिक वाहनों (EV), क्लीन एनर्जी (स्वच्छ ऊर्जा), इलेक्ट्रॉनिक्स और आधुनिक रक्षा उपकरणों के लिए बेहद जरूरी माने जाने वाले इन दुर्लभ खनिजों की एक अटूट सप्लाई चेन तैयार करना है, ताकि इस क्षेत्र में किसी एक देश के वैश्विक एकाधिकार और निर्भरता को कम किया जा सके।
दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र सिखाएगा चुनाव की एबीसीडी: बनेगी स्वदेशी EVM
इस रणनीतिक दौरे में एक बेहद अनोखा और गौरवशाली समझौता भी शामिल है, जो सीधे तौर पर इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) के विकास से जुड़ा है। भारत, इंडोनेशिया की चुनावी जरूरतों और उनकी भाषा-प्रणाली के अनुसार वहां की ईवीएम को विकसित करने में अपनी तकनीकी विशेषज्ञता (तकनीकी सहयोग) साझा करेगा। इस कदम को दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत की पारदर्शी चुनावी प्रणाली और हमारी घरेलू तकनीक पर दुनिया के बढ़ते विश्वास के सबसे बड़े प्रतीक के रूप में देखा जा रहा है।



