
नशे की लत आज सिर्फ एक सामाजिक बुराई नहीं, बल्कि हमारे देश के भविष्य यानी युवाओं के सामने खड़ी सबसे बड़ी चुनौती बन चुकी है। अंतरराष्ट्रीय नशामुक्ति दिवस के मौके पर देश के गृह मंत्री अमित शाह ने साफ शब्दों में कहा कि मोदी सरकार ने इस खतरे के खिलाफ “जीरो टॉलरेंस” की नीति अपनाई है और इसके खात्मे के लिए एक निर्णायक जंग छेड़ दी है।
तस्करी के नेटवर्क पर वार, पीड़ितों को प्यार और उपचार
गृह मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर एक बेहद संवेदनशील और मजबूत संदेश साझा किया। उन्होंने कहा कि सरकार की रणनीति दोतरफा है:
सख्त कार्रवाई: मादक पदार्थों की तस्करी करने वाले और युवाओं के भविष्य से खेलने वाले ड्रग माफियाओं के नेटवर्क को जड़ से उखाड़ फेंकना।
सहानुभूति और सुधार: नशे की लत का शिकार हो चुके लोगों को अपराधी नहीं, बल्कि पीड़ित मानकर उनकी देखभाल करना, उन्हें सही इलाज देना और समाज की मुख्यधारा में वापस लाना।
“हमारा लक्ष्य सिर्फ एक सुरक्षित समाज बनाना नहीं, बल्कि उन लोगों को भी गले लगाना है जो राह भटक गए हैं।
जमीन पर उतरी मुहिम: मरीना बीच पर जब युवाओं के साथ दौड़े सीएम स्टालिन
इस मुहिम का असर सिर्फ बयानों में नहीं, बल्कि जमीन पर भी देखने को मिला। तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई के मरीना बीच पर एक अलग ही ऊर्जा देखने को मिली, जब मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन खुद टी-शर्ट और स्पोर्ट्स शूज पहनकर ‘स्टार्ट रन, स्टॉप ड्रग्स’ (दौड़ें और नशे को रोकें) एंटी-ड्रग अवेयरनेस रन का हिस्सा बने। मुख्यमंत्री को अपने बीच पाकर युवाओं का जोश दोगुना हो गया। इस दौड़ का मकसद साफ था—युवाओं को यह बताना कि सेहत और खेल ही असली ‘हाई’ हैं, न कि ड्रग्स।
स्कूलों और कॉलेजों पर बड़ी जिम्मेदारी: उपराष्ट्रपति
इस मौके पर देश के उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने भी युवाओं के नाम एक बेहद जरूरी संदेश दिया। उन्होंने कहा कि देश को नशामुक्त बनाने में हमारे शिक्षण संस्थानों और सामाजिक संगठनों की भूमिका सबसे बड़ी है। उन्होंने युवाओं से एक भावुक अपील करते हुए कहा:
“नशे के अंधकार को छोड़िए, स्वास्थ्य, उम्मीद और अपने जीवन के बड़े लक्ष्यों को चुनिए। आपकी जिंदगी बेहद कीमती है।”
क्यों मनाया जाता है यह दिन?
हर साल 26 जून को दुनिया भर में ‘अंतरराष्ट्रीय नशामुक्ति दिवस’ मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र द्वारा साल 1989 से शुरू किए गए इस वैश्विक अभियान का एकमात्र मकसद दुनिया को मादक पदार्थों के दुरुपयोग और इसकी अवैध तस्करी से बचाना है।



