
नई दिल्ली: नीट-यूजी (NEET-UG) परीक्षा में कथित धांधली और देश भर में जारी उग्र छात्र आंदोलन के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना त्यागपत्र भेज दिया है।
मोदी सरकार के 12 साल के कार्यकाल (2014 से 2026) में यह पहला अवसर है, जब किसी केंद्रीय मंत्री ने किसी बड़े विरोध प्रदर्शन और जनाक्रोश के दबाव में अपने पद से इस्तीफा दिया हो। इस घटनाक्रम को केंद्र सरकार के लिए एक बड़े राजनीतिक मोड़ के रूप में देखा जा रहा है।
‘छात्रों का भविष्य विवादों से ऊपर’: धर्मेंद्र प्रधान
इस्तीफा देने के बाद सोशल मीडिया पर साझा किए गए अपने पत्र में धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि छात्रों का भविष्य और परीक्षा प्रणाली पर उनका विश्वास किसी भी व्यक्तिगत पद या विवाद से ऊपर है। उन्होंने अपने पत्र में निम्नलिखित मुख्य बातों का उल्लेख किया:
परीक्षा सुधार की आवश्यकता: देश की राष्ट्रीय परीक्षा प्रणाली में पारदर्शी और व्यापक सुधारों की आवश्यकता है।
निष्पक्ष जांच: पूरे मामले की सीबीआई (CBI) जांच को तेजी से आगे बढ़ाने और दोषियों पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करने की बात कही।
CBT व्यवस्था पर जोर: भविष्य में सभी प्रमुख प्रतियोगी परीक्षाओं को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट (CBT) मोड में आयोजित करने का सुझाव दिया।
जंतर-मंतर पर एक महीने से डटे थे छात्र
गौरतलब है कि पिछले एक महीने से राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और विभिन्न छात्र संगठनों के नेतृत्व में हजारों युवा और छात्र शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और परीक्षा रद्द करने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे थे।
हाल के दिनों में संसद कूच के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसक झड़पें, लाठीचार्ज और कई छात्र नेताओं व समाजसेवियों के समर्थन के बाद सरकार पर चौतरफा दबाव बढ़ गया था।
12 साल के इतिहास में पहला ऐसा फैसला
मोदी सरकार के पिछले 12 वर्षों के कार्यकाल में सीएए (CAA) विरोधी प्रदर्शनों से लेकर ऐतिहासक किसान आंदोलन तक, कई बड़े जनांदोलन हुए। हालांकि, उन आंदोलनों के दौरान सरकार ने किसी भी मंत्री का इस्तीफा स्वीकार नहीं किया था। ऐसे में धर्मेंद्र प्रधान का यह इस्तीफा देश की छात्र शक्ति और आंदोलन के बड़े प्रभाव के रूप में देखा जा रहा है।



