
उत्तराखंड के राजनीतिक गलियारों से इस वक्त की बड़ी खबर सामने आ रही है। लंबे समय से सरकारी बोर्डों, निगमों और परिषदों में लालबत्ती (दायित्व) मिलने का इंतजार कर रहे भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं के लिए धामी सरकार ने आखिरकार दायित्वों का पिटारा खोल दिया है। सरकार द्वारा जारी की गई दायित्वधारियों की इस नई सूची के बाद जहां भाजपा खेमे में जश्न का माहौल है, वहीं विपक्षी दल कांग्रेस की तर्ज पर चलने के आरोपों को लेकर सियासी चर्चाएं भी तेज हो गई हैं। इन चर्चाओं और आरोपों पर अब भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने खुलकर पलटवार किया है। “हम कांग्रेस की तरह कार्यकर्ताओं का ‘एडजस्टमेंट’ नहीं करते” — महेंद्र भट्ट
दायित्वधारियों की बढ़ती जा रही लिस्ट पर जब मीडिया ने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट से सवाल किया, तो उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि भाजपा और कांग्रेस की नीति और कार्यशैली में जमीन-आसमान का अंतर है।
कांग्रेस की सूची से एक तिहाई भी नहीं है हमारी लिस्ट, अभी और नाम आने बाकी!
महेंद्र भट्ट ने कांग्रेस शासनकाल की याद दिलाते हुए कहा कि भाजपा की मौजूदा दायित्व सूची कांग्रेस के समय की सूची के मुकाबले एक तिहाई भी नहीं है। उन्होंने साफ किया कि सरकार बेहद संतुलित तरीके से योग्य कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी सौंप रही है। इसके साथ ही, उन्होंने संगठन के उन कार्यकर्ताओं में नया जोश भर दिया जो इस लिस्ट में जगह नहीं बना पाए। भट्ट ने बड़े संकेत देते हुए कहा कि सरकार में सहयोगी के रूप में काम करने के लिए अभी कुछ और नाम भी जल्द ही दायित्वों की इस लिस्ट में शामिल किए जा सकते हैं, यानी आने वाले दिनों में लालबत्ती की एक और सूची देखने को मिल सकती है।
चुनावी साल से पहले संगठन को मजबूत करने की कवायद
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि धामी सरकार द्वारा दायित्वों का पिटारा खोलने के पीछे का मुख्य उद्देश्य संगठन के भीतर असंतोष को खत्म करना और जमीन पर काम करने वाले वरिष्ठ कार्यकर्ताओं को उनका हक देना है। इस फैसले से जहाँ सरकारी विभागों और निगमों के कामकाज में तेजी आने की उम्मीद है, वहीं आगामी राजनीतिक चुनौतियों के लिए भाजपा की जमीनी टीम और ज्यादा मजबूत होगी।



